लखनऊ। यौम-ए-आशूर पर शुक्रवार को राजधानी कर्बला के शहीदों की याद में मातम और अकीदत में डूबी रही। सुबह से देर शाम तक शहर में या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। शिया समुदाय के पारंपरिक जुलूसों में अकीदतमंदों ने सीना-जनी, जंजीरी मातम और नौहाख्वानी के जरिए हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत को याद किया। वहीं, सुन्नी समुदाय ने शहर के विभिन्न इलाकों से ताजियों के जुलूस निकालकर बादशाहनगर स्थित कर्बला में परंपरागत रस्मों के साथ ताजिए दफन किए। सदियों पुरानी अजादारी की परंपरा और लखनऊ की गंगा-जमुनी तहजीब पूरे दिन देखने को मिली।
शिया समुदाय का मुख्य जुलूस सुबह विक्टोरिया स्ट्रीट स्थित इमामबाड़ा नाजिम साहब से अंजुमन अब्बासिया की अगुवाई में निकला। इसके अलावा अंजुमन गुंचाये मेहंदिया, अंजुमन शब्बीरिया, रौनके दीने इस्लाम समेत विभिन्न अंजुमनों के अलम, ताबूत और जुलूस शिया कॉलेज, अकबरी गेट, नक्खास, बिलौजपुरा और हैदरगंज होते हुए कर्बला तालकटोरा पहुंचे।
सुन्नी समुदाय की ओर से अबरार नगर, विकास नगर, डालीगंज, निशातगंज, चौक, ठाकुरगंज, महानगर, ऐशबाग समेत शहर के विभिन्न मोहल्लों से ताजियों के जुलूस निकाले गए। जुलूस मार्ग पर जगह-जगह सबीलें लगाकर शरबत व अन्य पेय पदार्थ वितरित किए गए।
मातम करते अजादार
मातम करते अजादार