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स्कूलों के पास ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के प्रस्ताव पर गौर करे राज्य सरकार : हाईकोर्ट

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हाईकोर्ट।
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लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी के स्कूलों के खुलने और बंद होने के समय लगने वाले जाम के मामले में राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि सभी संबंधित विभागों समेत स्कूलों के प्राधिकारियों के साथ बैठक कर ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के प्रस्ताव पर गौर करे। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश गोमती रिवर बैंक रेजीडेंट्स की ओर से वर्ष 2020 में दाखिल की गई जनहित याचिका पर दिया है। याचिका में शहर के स्कूलों के खुलने और छूटने के समय सड़कों पर जाम लगने की समस्या से लोगों को होने वाली परेशानी का मुद्दा उठाया गया है।
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कोर्ट ने स्कूलों की वजह से लगने वाले जाम से निजात के संबंध में पूर्व में कई आदेश दिए थे, जिनके पालन में अदालत को जानकारी दी गई। कोर्ट को यह भी बताया गया कि 12 मार्च तक पुलिस ने मार्शल्स को ट्रेनिंग दी, जिसके बाद उन्हें स्कूलों के पास तैनात किया गया। इससे पहले सुनवाई पर पुलिस विभाग की ओर से ट्रैफिक समस्या दूर करने के लिए स्कूलों के अंदर और बाहर प्रशिक्षित मार्शलों की तैनाती का सुझाव दिया गया था, जिसकी कोर्ट ने अनुमति दी थी।



सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता जेएन माथुर ने हाईकोर्ट को बताया था कि ला मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज, लोरेटो कान्वेन्ट कॉलेज व सिटी मॉन्टेसरी स्कूल्स के आसपास ट्रैफिक व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है। हालांकि, विनीत खंड स्थित सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल को अभी काफी प्रयास की आवश्यकता है। वहीं, हाईकोर्ट को यह भी बताया गया था कि 18 स्कूलों ने दस-दस लोगों को मार्शल ट्रेनिंग के लिए भेजा है। इस पर कोर्ट ने डीसीपी, ट्रैफिक को मार्शल्स की तैनाती और उसके प्रभाव के संबंध में रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। इसके तहत, राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता समेत वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट के पहले के निर्देशों की पालन रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में कोर्ट ने पाया कि कुछ मार्शलों का कार्य संतोषजनक नहीं है।
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इसी 30 मार्च को सुनवाई के समय डी सीपी(यातायात) रवीना त्यागी ने कोर्ट में पेश होकर स्कूलों के आस पास यातायात व्यवस्था में सुधार की जानकारी दी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 अप्रैल की तिथि निर्धारित की है।
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