लखनऊ। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी का मंच इस समय एक खूबसूरत संगीत साधना–स्थल में बदल गया है। प्रादेशिक शास्त्रीय संगीत प्रतियोगिता के दूसरे चरण ने मंगलवार को संत गाडगे जी प्रेक्षागृह को सुरों की झंकार से भर दिया।
जैसे ही मंच पर खयाल, तराना, ध्रुपद, धमार, ठुमरी और दादरा की प्रस्तुतियां शुरू हुईं। किशोर कलाकारों ने अपनी साधना और सुरों की तपस्या से दर्शकों को अभिभूत कर दिया। सचमुच, मंच शास्त्रीय साधना से जगमगा उठा और नई प्रतिभाएं पूरे आत्मविश्वास के साथ निखर कर सामने आईं। खयाल तराना में “बिना हरि कौन” ठुमरी दादरा में जय जय जय दुर्गे माता भवानी..., कौन गली गयो श्याम..., जागत बीती रैन मितवा मोरा साजना जैसे गीतों की प्रस्तुतियों ने पूरे प्रेक्षागृह को संगीतमय कर दिया।
निर्णायक खंडवा के रोमिल जैन, ग्रेटर नोएडा की नबनिता चौधरी और दिल्ली के पंडित राधा गोविंद दास ने कलाकारों का हौसला बढ़ाया। विजेताओं की सरहाना की। रेनू श्रीवास्तव और डॉ. पवन तिवारी के संयोजन में हो प्रतियोगिता का मंच संचालन राजेंद्र विश्वकर्मा हरिहर ने किया।
इन विधाओं में ये निखरीं ये प्रतिभाएं
खयाल तराना : जयंतिका डे प्रथम (वाराणसी), अनुशांत मिश्रा द्वितीय (गोरखपुर) और धरा खरे तृतीय (गाजियाबाद)
ठुमरी दादरा : प्रियाक्षी पांडेय (कानपुर), जयंतिका डे द्वितीय (वाराणसी) और अनुषा त्रिवेदी तृतीय (बरेली)
ध्रुपद धमार : वत्सला बाजपेई (बांदा), वैष्णवी तिवारी (बांदा) और जाह्नवी मिश्र तृतीय (वाराणसी)
शास्त्रीय साधना से दमका मंच, किशोर प्रतिभाओं ने बिखेरी रौनक
शास्त्रीय साधना से दमका मंच, किशोर प्रतिभाओं ने बिखेरी रौनक
शास्त्रीय साधना से दमका मंच, किशोर प्रतिभाओं ने बिखेरी रौनक