अयोध्या में जब श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की घड़ी नजदीक आनी शुरू हो गई है तो विश्व हिंदू परिषद ने इससे देश भर के हिंदुओं के सरोकार जोड़ने और माहौल को राममय बनाने की तैयारी नए सिरे से शुरू कर दी है। मंदिर को हिंदुत्व के साथ राष्ट्रचेतना का प्रतीक बनाने की भी रणनीति को परवान चढ़ाना शुरू कर दिया है।
बौद्ध, सिख और जैन सहित हिंदू आस्था से जुड़े सभी पंथों की श्रद्धा से जुड़े स्थलों की मिट्टी और नदियों के जल के साथ ही महान क्रांतिकारियों की धरती और ऐतिहासिक किलों की भी मिट्टी लाकर उनसे राम मंदिर के सरोकार जोड़ने की योजना है।
अयोध्या आंदोलन ने देश की सियासत को ही नहीं बदला, बल्कि हिंदुत्व को राजनीति के केंद्र में लाकर मजबूती से खड़ा कर दिया। इसमें विहिप ने सूत्रधार के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसलिए जब श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की प्रतीक्षा समाप्त होने जा रही है तो विहिप इसके सहारे देश भर में उत्साह और उत्सव का माहौल बनाने के साथ ही अयोध्या के सहारे ‘हिंदुत्व ही राष्ट्रीयत्व’ के संकल्प को भी साधना चाहती है ।
यह भी है योजना
विहिप के एक पदाधिकारी कहते हैं कि राम मंदिर को लेकर हिंदुत्व विरोधी ताकतें लगातार षड्यंत्र करती रही हैं। कभी बौद्ध तो कभी जैन की बात उठाकर श्रीराम जन्मभूमि स्थल को लेकर निराधार विवाद खड़ा करने की कोशिश करती रहीं। मंदिर निर्माण के सहारे विहिप की कोशिश यह संदेश देने की है कि बौद्ध, जैन और सिख ही नहीं बल्कि कबीर जैसे संतों के अनुयायी भी हिंदुत्व के लिए गैर नहीं हैं। यही नहीं, क्रांतिकारियों की धरती भी किसी पवित्र तीर्थ स्थल से कम नहीं है।
25 ग्राम मिट्टी व 100 ग्राम जल
जानकारी के मुताबिक, मंदिर निर्माण के लिए हर तीर्थ से 50 ग्राम मिट्टी और नदी से अधिकतम 100 ग्राम जल अयोध्या लाने की योजना बनाई गई है। इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित तीर्थों और नदियों के साथ उस इलाके के क्रांतिकारियों व संतों की सूची भी तैयार की जा रही है। जैसे, मिर्जापुर से अष्टभुजा देवी, विंध्यवासिनी और काली खोह जैसे स्थानों की मिट्टी लाई जाएगी तो चंदौली से बाबा किनाराम के जन्मस्थल से भी मिट्टी मंगाई जाएगी। बौद्ध तीर्थस्थल कुशीनगर और लुंबिनी के साथ ही संत कबीर के मगहर, रानी लक्ष्मीबाई के झांसी स्थित किले तथा चंद्रकांता संतति जैसी कृति के आधार सोनभद्र के विजयगढ़ दुर्ग की मिट्टी लाकर मंदिर में लगाने की रणनीति बनी है।
छोटे समूहों में आएंगे कार्यकर्ता
कोरोना के मद्देनजर इस काम को शारीरिक दूरी बनाए रखते हुए छोटे-छोटे समूह में करने की सलाह दी गई है। जानकारी के अनुसार मंदिर निर्माण के दौरान अलग-अलग स्थानों से अलग-अलग दिन विहिप के तीन या चार कार्यकर्ता मिट्टी व जल लेकर अयोध्या पहुंचाते रहेंगे। लौटते वक्त वे श्रीराम जन्मभूमि स्थल की थोड़ी-सी मिट्टी और सरयू का जल अपने साथ ले जाएंगे। मंदिर निर्माण के दौरान वे अपने गांव में इस मिट्टी व जल का पूजन करने के साथ मंदिर के इतिहास व इसके लिए हुए संघर्ष तथा हिंदुत्व से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा करते रहेंगे।