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Lucknow News: महापौर और नगर आयुक्त के बीच और गहरी हुई विवाद की खाई

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महापौर सुषमा खर्कवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार के बीच चल रही तनातनी कम होने के बजाय और बढ़ रही है। शुक्रवार को महापौर ने कहा कि नगर निगम के अधिकारी बिना उनकी संस्तुति के उनके कार्यालय में तैनात कर्मचारी पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं कर सकते। उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि अफसरों ने खुद आने के बजाय उन्हें ईमेल से बजट की प्रति भेजी है।
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अपर नगर आयुक्त प्रशासन आयुक्त ललित कुमार की रिपोर्ट पर अपर नगर आयुक्त अधिष्ठान नम्रता सिंह ने बुधवार को महापौर कार्यालय में तैनात बाबू सुखदेव का वेतन रोक दिया था। ये कार्रवाई इसलिए की गई थी, क्योंकि बाबू ने नगर निगम की ओर से भेजे गए पुनरीक्षित बजट की प्रति रिसीव करने से मना कर दिया था। बाबू का कहना था कि उसे महापौर कैंप कार्यालय में तैनात निजी सचिव ने मना किया था।



वेतन रोकने की कार्रवाई का खुलासा

बृहस्पतिवार को कार्यकारिणी बैठक में महापौर और नगर आयुक्त के बीच विवाद होने के बाद देर शाम बाबू का वेतन रोकने की कार्रवाई सामने आई। इस मामले में महापौर का कहना है कि उनके कार्यालय में किसी कर्मचारी पर नगर आयुक्त या अपर नगर आयुक्त तभी कार्रवाई कर सकते हैं, जब वह संस्तुति रिपोर्ट भेजेंगी। बाबू सुखदेव के खिलाफ कार्रवाई नियमों के विपरीत हुई है। इसे निगम प्रशासन को वापस लेना होगा।
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खुद नहीं आए और अब ई मेल से भेजा बजट

महापौर सुषमा खर्कवाल ने बृहस्पतिवार को कार्यकारिणी बैठक में इस बात को लेकर कड़ी नाराजगी जताई थी कि पुनरीक्षित बजट की प्रति उनके पास पहले चपरासी के जरिये भेजी गई। जब उसने लेने से मना किया गया तो डाक से भेजने का प्रयास किया गया। यह तरीका सही नहीं है। बजट को लेकर अफसरों को पहले उनसे चर्चा करनी चाहिए थी। प्रति खुद लेकर आना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया। महापौर ने बताया कि जब डाक से प्रति नहीं ली गई तो अब अफसरों ने उसे ईमेल से भेजा है।
जानकारों ने बताया कि शुक्रवार सुबह महापौर सुषमा खर्कवाल ने नगर निगम मुख्यालय स्थित अपने कक्ष में मुख्य वित्त एवं वरिष्ठ लेखाधिकारी को बुलाकर कड़ी नाराजगी जताई। पूछा कि क्या वह भी नगर आयुक्त हो गए हैं जो खुद बजट की प्रति लेकर उनके पास नहीं आ सकते थे। महापाैर के सवालों का वरिष्ठ लेखाधिकारी कोई जवाब नहीं दे सके।



किसने लीक किया वीडियो, हो रही जांच
नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में महापौर और नगर आयुक्त के बीच अधिकारों को लेकर बहस का वीडियो बृहस्पतिवार रात सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसकी जानकारी के बाद नगर निगम प्रशासन जांच करा रहा है कि आखिर वीडियो बनाया और लीक किया। बैठक की वीडियो रिकाॅर्डिंग नगर निगम का अधिकृत कैमरामैन ही करता है, मगर वायरल वीडियो उसके कैमरे या मोबाइल से नहीं बनाया गया। ऐसे में सवाल ये है कि वह वह कौन है, जिसने अनधिकृत रूप से वीडियो रिकाॅर्डिंग की और उसे वायरल किया, क्योंकि बैठक की वीडियो रिकाॅर्डिंग की अनुमति किसी अन्य को नहीं है। इधर, नगर आयुक्त ने जांच कराने की चर्चा से इन्कार किया है।
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अभी शासन को कोई रिपोर्ट नहीं भेजी है। देखते हैं कि नगर आयुक्त कब तक लंबित मामलों को हल कर पाते हैं। जब वह बताएंगे, तभी बैठक होगी। वह मेरे कैंप कार्यालय में तैनात कर्मचारी पर बिना अनुमति कार्रवाई नहीं कर सकते। नगर आयुक्त को हटाने की मांग भी शासन से नहीं की जा रही है।
- सुषमा खर्कवाल,
महापौर

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किसी मामले को लेकर शासन में कोई रिपोर्ट नहीं भेजी गई है। जो प्रस्ताव लंबित हैं, उन पर नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है। महापौर कैंप कार्यालय में तैनात बाबू पर जो कार्रवाई अपर नगर आयुक्त स्तर से हुई होगी, वह नियमों के तहत ही होगी। विकास का बजट कार्यकारिणी ही पास करता है।
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- गौरव कुमार,
नगर आयुक्त
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