लखनऊ। आठ वर्ष के लंबे इंतजार के बाद आई सहायक अध्यापक, प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी की परीक्षा शनिवार को राजधानी के 44 केंद्रों पर आयोजित हुई, लेकिन यह परीक्षा हजारों अभ्यर्थियों के लिए उम्मीद की जगह अफसोस बन गई। वजह सिर्फ पांच से दस मिनट की देरी। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के सख्त निर्देशों के तहत परीक्षा शुरू होने से 45 मिनट पहले ही प्रवेश बंद कर दिया गया। इस कारण दूर-दराज से पहुंचे बड़ी संख्या में अभ्यर्थी केंद्र के गेट पर ही रोक दिए गए।
सिटी स्टेशन रोड स्थित राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज सहित कई केंद्रों पर यही दृश्य देखने को मिला। विकास नगर स्थित राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में गोरखपुर से आई दिव्या मात्र पांच मिनट देरी से पहुंचीं। उन्होंने 1090 पर कॉल कर गुहार भी लगाई, लेकिन नियमों के आगे कोई समाधान नहीं निकला। दिव्या ने कहा, आठ साल बाद भर्ती आई थी, अब पता नहीं दोबारा मौका कब मिलेगा। दिल्ली से आए प्रदीप यादव और प्रयागराज से पहुंचे महफूज अहमद अंसारी भी कुछ मिनट विलंब के कारण परीक्षा से वंचित रह गए।
पहली पाली में 20,000, द्वितीय पाली में 11,000 अभ्यर्थी थे पंजीकृत
जिलाधिकारी विशाख जी के अनुसार, सुबह 9 से 11 बजे तक पहली पाली की परीक्षा में करीब 21 हजार अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें लगभग 12 हजार ही उपस्थित हो सके, जबकि करीब 7 हजार ने परीक्षा छोड़ दी। दूसरी पाली में 11 हजार से अधिक पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 6700 शामिल हुए और 4200 से अधिक अनुपस्थित रहे। कुल मिलाकर राजधानी में करीब 12 हजार अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए।
कड़वी सीख दे गई परीक्षा
यह घटना एक कड़वी सीख भी देती है। प्रवेश पत्र अभ्यर्थियों के पास समय से पहुंचता है और उसमें परीक्षा से जुड़े सभी निर्देश स्पष्ट रूप से लिखे होते हैं। आयोग के नियम किसी एक के लिए नहीं बदले जा सकते। प्रतियोगी परीक्षाओं में समय प्रबंधन उतना ही जरूरी है जितनी तैयारी। घर से अतिरिक्त समय लेकर निकलना, ट्रैफिक और दूरी को ध्यान में रखना अभ्यर्थियों की जिम्मेदारी है। आठ वर्ष बाद मिली इस परीक्षा ने यह साफ कर दिया कि सपनों की मंजिल तक पहुंचने में मेहनत के साथ अनुशासन और समय की पाबंदी भी उतनी ही जरूरी है।
आठ वर्ष के लंबे इंतजार के बाद आई सहायक अध्यापक, प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी की परीक्षा शनिवार को र
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