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अखिलेश ने दिया सिग्नल, गद्दारी बर्दाश्त नहीं!

Mon, 10 Mar 2014 01:32 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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दो मंत्रियों को बर्खास्त करके मुख्यमंत्री और सपा के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विधायकों, मंत्रियों और पार्टी नेताओं को संदेश दे दिया है कि लोकसभा चुनाव में भितरघात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ काम करने वाले सरकार या संगठन के कुछ और ओहदेदारों पर गाज गिर सकती है।
 
सपा लोकसभा चुनाव को लेकर काफी गंभीर है। एक साल पहले प्रत्याशी चयन से लेकर रैलियों की श्रृंखला पूरी कर ली गई है।
बूथ प्रभारियों से लेकर मंत्रियों, विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों से हर स्तर पर तैयारियों का जायजा लिया जा रहा है।

मदद करें, या कार्रवाई के लिए रहें तैयार

मंत्री आनंद सिंह और मनोज पारस को जिस तरह बर्खास्त किया गया है, उससे पार्टी नेतृत्व ने बागी और भितरघाती तेवर अपनाने वालों को साफ संकेत दे दिया है।

वे पार्टी प्रत्याशियों की खुलकर मदद करें या कार्रवाई के लिए तैयार रहें। संगठन, विधायक, मंत्री और प्रत्याशियों के बीच परस्पर तालमेल न बैठाने वाले नेताओं के लिए बर्खास्तगी एक संदेश है।

दरअसल, सपा लोकसभा चुनाव पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के नाम पर लड़ रही है। केंद्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभाने का तानाबाना बुन रही सपा किसी भी सीट को लेकर लापरवाही बरतने के मूड में नहीं है।

मुलायम-अखिलेश कर चुके हैं वन-टू-वन बात

कई बैठकों में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हर लोकसभा सीट के प्रत्याशियों, जिला पदाधिकारियों और प्रमुख नेताओं से वन टू वन चर्चा कर चुके हैं।

उनसे पूछ चुके हैं कि कहां तालमेल की कमी है और कौन सहयोग नहीं कर रहा है। लोकसभा प्रभारियों की रिपोर्ट में भी कुछ नेताओं के असहयोगात्मक रुख का उल्लेख किया गया है।

पार्टी के चैनलों के साथ ही गैर सरकारी आधार पर जिलेवार फीड बैक लिया जा रहा है।

कीर्तिवर्धन के बयान पर भड़के चौधरी

सपा के प्रदेश प्रवक्ता और कारागार मंत्री राजेन्द्र चौधरी ने सपा छोड़ भाजपा में शामिल हुए पूर्व सांसद कीर्तिवर्धन के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया जताई है जिसमें उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से मिलने के लिए रिश्वत देनी पड़ती है।

राजेन्द्र चौधरी ने कहा, सपा सरकार की लोकप्रियता व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के प्रति जनता में बढ़ते विश्वास से विपक्षी दलों को भारी परेशानी है।

वे लोकसभा चुनाव के समय सरकार और मुख्यमंत्री की छवि धूमिल करने की सुनियोजित साजिशों को अंजाम दे रहे हैं, लेकिन उन्हें जनता को बरगलाने में कामयाबी मिलने वाली नहीं है।

कीर्तिवर्धन को कह दिया सिरफिरा

उन्होंने कहा, अखिलेश यादव सहज सुलभ और संवेदनशील नेता हैं। उनके लोकतांत्रिक और सौम्य व्यवहार के विरोधी भी कायल हैं।

इसके बावजूद एक असंतुष्ट और विरोधी पार्टी में शामिल नेता (कीर्तिवर्धन) का मुख्यमंत्री कार्यालय के संबंध में बयान पूर्णतया निराधार, अनर्गल और अनैतिक है।

मुख्यमंत्री से रोज ही सैकड़ों लोग मिलते हैं, सुबह शाम और कभी-कभी तो रात तक वे लोगों से मिलते हैं। आए हुए किसी शख्स को वे निराश नहीं करते। उनके बारे में ऐसी ओछी बात कोई सिरफिरा ही कर सकता है।

सपा के खिलाफ काम करने का आरोप

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कृषि मंत्री कुंवर आनंद सिंह और स्टांप एवं पंजीयन राज्यमंत्री मनोज पारस को रविवार को मंत्रिपरिषद से बर्खास्त कर दिया।

दोनों मंत्रियों पर सपा प्रत्याशियों के खिलाफ काम करने का आरोप है। 75 वर्षीय कुंवर आनंद सिंह 2012 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बसपा छोड़कर सपा में शामिल हुए थे।

वे गोंडा की गौरा सीट से विधायक हैं। हाल ही में उनके पुत्र और पूर्व सांसद कीर्तिवर्धन सपा से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए हैं।

वहीं, 47 वर्षीय मनोज पारस बिजनौर जिले की नगीना (सुरक्षित) सीट से विधायक हैं। पारस अपने गांव की महिला के साथ गैंगरेप के आरोपों को लेकर चर्चा में रहे। यह मामला अदालत में विचाराधीन है। सरकार ने उनके खिलाफ केस वापस लेने की सिफारिश भी की थी।

बेटे की जहरीली जुबां बाप पर पड़ी भारी!

बेटे और गोंडा के पूर्व सांसद कीर्तिवर्धन ने जब सपा से बगावत कर भाजपा का दामन थाम लिया था, तभी से आनंद सिंह के भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जा रही थी। हालांकि तब आनंद ने कहा था कि वह पार्टी नहीं छोड़ेंगे। भले ही मुलायम सिंह उन्हें निकाल दें। नैतिकता भी कोई चीज होती है।

इस बीच, कीर्तिवर्धन ने शनिवार को मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगा दिया कि उनसे मिलने के लिए सीएम के स्टाफ को हर बार 5-5 हजार रुपये की घूस देनी पड़ती है।

यही नहीं, गन्ना किसानों के बजाए चीनी मिल मालिकों के हितों का संरक्षण का भी आरोप लगाया। इस आरोप से सकते में आई सरकार ने आनंद की बर्खास्तगी की पटकथा तैयार कर ली थी।

बर्खास्तगी पर आनंद सिंह ने कहा, मैं क्या कहूं? नेताजी की पार्टी है। उन्होंने जो ठीक समझा किया। हमें उनके फैसले पर ऐतराज नहीं है।’

नापसंद थी पारस की बसपा से नजदीकी

सपा नेतृत्व को पिछले कुछ दिनों से सूचनाएं मिल रही थी कि मनोज पारस अपने भाई धर्मेंद्र पारस को नगीना लोकसभा सीट से बसपा का टिकट दिलाने के लिए प्रयासरत हैं।

उन पर पार्टी प्रत्याशी और मौजूदा सांसद यशबीर धोबी के खिलाफ काम करने की भी शिकायतें थीं। यही नहीं, उनके एक नजदीकी रिश्तेदार भी भाजपा से लोकसभा टिकट के दावेदार हैं।

इसमें मनोज उनकी मदद कर रहे थे। मनोज के खिलाफ कुछ ऐसे लोगों ने भी शिकायत की थी जिनका सपा से सीधा संबंध नहीं है। शिकायतों में दम पाए जाने पर उन्हें मंत्रिपरिषद से बर्खास्त कर दिया गया। हालांकि मनोज पारस ने इस मामले पर कहा कि मुख्यमंत्री ने न हमसे पूछकर मंत्री बनाया था और न ही पूछकर हटाया है। पार्टी के हित में मंत्री बनाया था।

बकौल पारस हो सकता है कि उन्हें लग रहा हो कि उनके हटने से पार्टी का हित हो रहा है, इसलिए मंत्री पद से हटा दिया हो। मैं कभी पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल नहीं रहा हूं। हमारे परिवार केकिसी सदस्य का बसपा से कोई संबंध नहीं है।
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जानिए, कौन हैं ये दोनों मंत्री

कुंवर आनंद सिंह
निवासी-मनकापुर कोट, जिला गोंडा।
शिक्षा: इलाहाबाद विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग ग्रेजुएट
1964, 1976, 1969, 2012 में विधायक। 1969 में चंद्रभान गुप्त सरकार में कृषि एवं गन्ना विभाग के मंत्री बने।
वर्ष 1971 और 1980 में लोकसभा सदस्य चुने गए।

मनोज पारस
निवासी-ग्राम बिंजाहेड़ी, नगीना (बिजनौर)
शिक्षा: इंटरमीडिएट
2012 में पहली बार विधायक बने। स्टांप शुल्क एवं न्यायालय शुल्क पंजीयन राज्यमंत्री बने।
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