लखनऊ। भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के जयशंकर प्रसाद सभागार में बृहस्पतिवार को ''''समाज के उत्थान में महिलाओं का योगदान'''' विषय पर संगोष्ठी हुई। कार्यक्रम में चिकित्सा, शिक्षा और उद्यमिता जगत की प्रतिष्ठित महिलाओं ने शिरकत किया और समाज के सर्वांगीण विकास में स्त्री शक्ति की अनिवार्य भूमिका पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि नारी शक्ति के बिना समाज का उत्थान अधूरा है।
संगोष्ठी के प्रथम सत्र में वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋतु सक्सेना ने महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सामाजिक प्रगति का आधार बताया। जब महिला स्वस्थ और जागरूक होगी, तभी वह समाज को नई दिशा दे पाएगी। लखनऊ विश्वविद्यालय की प्रो. निशी पांडेय ने शिक्षा के माध्यम से महिला सशक्तीकरण पर जोर दिया। कहा कि वैचारिक स्वतंत्रता ही वास्तविक स्वतंत्रता है। जब तक महिलाएं मन से स्वतंत्र नहीं होंगी वे सशक्त नहीं हो सकती।
द्वितीय सत्र में आधुनिक चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा हुई। उद्यमी मंजरी पांडेय ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। शिक्षाविद व परामर्शदाता रोमा बच्चानी ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में मन को शांत रखना बहुत जरूरी है। जीवन में सफल होने के लिए मानसिक रूप से स्वस्थ रहना जरूरी है। विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. सृष्टि धवन ने कहा कि समाज का कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है जहां महिलाओं ने अपनी योग्यता साबित न की हो। विद्यार्थियों ने भी वक्ताओं से संवाद किया और आधुनिक युग में नारीत्व की बदलती परिभाषाओं को समझा। कार्यक्रम का संयोजन प्रो. सृष्टि माथुर ने किया।