लखनऊ। 13वीं शताब्दी के महान भारतीय संगीतज्ञ शारंगदेव की स्मृति में तीन दिवसीय महोत्सव का आयोजन शुक्रवार को भातखंडे संस्कृति विवि में किया गया। बली प्रेक्षागृह में व्याख्यान और सेमिनार का आयोजन किया गया। शाम को कलामंडपम में शास्त्रीय संगीत पर आधारित नृत्य प्रस्तुतियों ने मन मोहा।
भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय और महागामी गुरुकुल कला एवं शोध संस्थान, संभाजीनगर के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को 19वें शांरगदेव महोत्सव का आयोजन पद्मविभूषण पं. बिरजू महाराज की स्मृति में स्थापित चेयर की ओर से किया गया। प्रथम सत्र ‘शारंगदेव प्रसंग’ का शुभारंभ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह, पद्मश्री दर्शना झावेरी, पूर्व कुलपति प्रो. पूर्णिमा पांडेय, महागामी गुरुकुल कला एवं शोध संस्थान की निदेशक पार्वती दत्ता, गायन विभागाध्यक्ष प्रो. सृष्टि माथुर, तालवाद्य विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज मिश्रा, नृत्य विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक ज्ञानेंद्र दत्त बाजपेयी, डॉ. रुचि खरे और रेनू शर्मा ने बली प्रेक्षागृह में संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर किया।
पार्वती दत्ता ने शारंगदेव की रचना संगीत रत्नाकर पर चर्चा करते हुए कहा कि नृत्य में विद्या, कला, शिल्प और साधना का संयुक्त प्रयोग नर्तक को पारंगत बनाता है। उन्होंने कथक और ओडिसी में लास्यांग और घरघरा के प्रयोग पर भी विस्तार से बताया। पार्वती दत्ता ने “कथक और ओडिसी में संगीत रत्नाकर की अवधारणाएं” विषय पर आचार्य शारंगदेव के प्रतिपादित शास्त्रीय सिद्धांतों के आलोक में कथक और ओडिसी नृत्य के विविध शास्त्रीय एवं सौंदर्यात्मक पक्षों को प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि नृत्य के सिलेबस में उपरूपक के प्रयोग का भी महत्व है। इस दौरान उनकी शिष्याओं सिद्धि और ऐश्वर्या ने कथक और ओडिसी की प्रस्तुति दी। कुलपति मांडवी सिंह ने लखनऊ की कथक परंपरा, परीखाना और कालका–बिंदादीन महाराज की ड्योढ़ी के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्व की व्याख्या की। द्वितीय सत्र ‘शारंगदेव प्रवाह’ में शोधार्थियों ने शोध प्रस्तुतियां दीं।
शाम को ओडिसी नृत्य की प्रस्तुतियों ने किया मंत्रमुग्ध
तृतीय सत्र ‘शारंगदेव समारोह’ के अंतर्गत शाम को विश्वविद्यालय के कला मंडपम सभागार में भव्य नृत्य एवं संगीत महोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति महागामी वृंद (छत्रपति संभाजी नगर) की ओर से दी गई। वहीं ध्रुपद गायन में उस्ताद वसीफुद्दीन डागर (दिल्ली) और पखावज संगत में पं. मोहन श्याम शर्मा ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को शास्त्रीय संगीत की सूक्ष्म बारीकियों से परिचित कराया। समापन सत्र ‘शारंगदेव स्पंदन’ कार्यशाला के रूप में आयोजित किया गया।
भातखंडे विवि और एमजीएम यूनिवर्सिटी के बीच एमओयू
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय और महागामी गुरुकुल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स, एमजीएम यूनिवर्सिटी- महाराष्ट्र के बीच एक समझौता ज्ञापन भी का आदान–प्रदान किया गया। इसके अंतर्गत संगीत एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के पारस्परिक आदान–प्रदान को सुदृढ़ करने पर सहमति बनी। इसी सत्र में लगभग 25 शोधार्थियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। डॉ. चेतना ज्योतिषी व्योहार वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहीं।
नृत्य की बारीकियों पर चर्चा के साथ प्रस्तुतियों ने मोहा मन
नृत्य की बारीकियों पर चर्चा के साथ प्रस्तुतियों ने मोहा मन
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नृत्य की बारीकियों पर चर्चा के साथ प्रस्तुतियों ने मोहा मन
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नृत्य की बारीकियों पर चर्चा के साथ प्रस्तुतियों ने मोहा मन