लखनऊ। मोहब्बत वह शय है जिसमें हारकर भी शख्स जीत जाता है और जीतकर भी हार जाता है। एमबी क्लब छावनी में शुक्रवार शाम मंचित नाटक ‘वो अफसाना’ भारतीय साहित्य की दो प्रतिष्ठित हस्तियों साहिर लुधियानवी और अमृता प्रीतम को गीतों भरी भावपूर्ण श्रद्धांजलि दे गया। हुनर क्रिएशन एंड क्राफ्ट एसोसिएशन की ओर से दिल्ली की राब्ता संस्था के कलाकारों ने शमीर के निर्देशन में नाटक का मंचन किया। मुख्य अतिथि चीफ ऑफ स्टाफ मध्य कमान सीजे जयचंद्रन ने कलाकारों को सम्मानित किया।
साहिर को गुजरे हुए करीब पांच दशक और अमृता के निधन के दो दशक हो गए हैं। प्रमाणित तथ्यों से प्रेरित और व्यापक शोध पर आधारित नाटक ‘वो अफसाना’ में कविताओं और घटनाओं को बड़ी शिद्दत के साथ पिरोया गया। वह अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा... ये अल्फाज हैं साहिर के जिसे मंच पर चरितार्थ किया गया। अमृता की पंजाबी कविताओं के संग साहिर लुधियानवी के भावपूर्ण गीत जिंदगी भर नहीं भूलेगी वो..., ठंडी हवाएं..., कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है..., देखिये फिर आपने प्यार से देखा मुझको..., जाने वो कैसे लोग थे जिनके प्यार को प्यार मिला..., अभी न जाओ छोड़कर..., मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया...जैसे गीतों ने नाटक में जान फूंक दी।
संयोजक जफर नबी ने बताया कि सुदेश सेठी और जयश्री के संकलित इस नाटक में स्वयं साहिर की भूमिका स्वयं निर्देशक शमीर साहिर ने और अमृता का किरदार डाॅ. जयश्री सेठी ने निभाया। गीतों में श्रिया अरोड़ा और जावेद ने आवाज दी। मंच के पीछे श्वेता मिश्रा व स्वाति ने अहम भूमिका निभाई।