रायबरेली जिला अस्पताल की ओपीडी में बच्चे का इलाज करते चिकित्सक।
रायबरेली। जिले के स्कूलों व आंगनबाड़ी केंंद्रों में बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण का काम करीब एक साल से ठप है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के खाते में चार करोड़ से अधिक का बजट डंप है, लेकिन मोबाइल हेल्थ टीमों को लाने व ले जाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास वाहन तक नहीं है।
जिस फर्म के पास वाहन उपलब्ध कराने का अनुबंध था, उसे पिछले साल ही हटा दिया गया। अब तक वाहनों के लिए टेंडर प्रक्रिया न होने के कारण बच्चों की सेहत जांचने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।
स्कूलों में 19 साल से कम उम्र के बच्चों की सेहत जांचने और उनका इलाज करने के लिए सीएचसी स्तर पर आरबीएसके की 36 टीमें गठित हैं। इसमें डॉक्टरों के साथ अन्य टीमें भी रखी गई हैं। योजना के तहत हर रोज प्रत्येक सीएचसी से दो टीमें अलग-अलग स्कूलों में पहुंचकर बच्चों की सेहत को जांचेंगी।
पिछले साल अक्तूबर माह से फर्म ने वाहन देने से इंकार कर दिया था। इसके बाद से लगातार यह योजना दम तोड़ रही है। टीमें स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों में वाहनों के अभाव में नहीं पहुंच पा रहीं हैं। विभाग ने साख बचाने के लिए कुछ स्कूलों में पहुंचकर कागजी खानापूर्ति की है।
यह है आरबीएसके योजना ः राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत हर ब्लॉक के लिए दो-दो मोबाइल हेल्थ टीमें बनाई गईं हैं। इनमें चिकित्सक, एएनएम, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, चतुर्थ श्रेणी व अन्य कर्मचारी शामिल हैं। यह टीमें स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहुंचकर बच्चों को स्वास्थ्य परीक्षण करती हैं। सामान्य रोगों से ग्रस्त बच्चों को दवा उपलब्ध कराती हैं। जांच के लिए सैंपल लेती हैं। जन्मजात विकृतियों व अन्य गंभीर रोगों से ग्रस्त बच्चों को मेडिकल काॅलेज या जिला अस्पताल रेफर करती हैं।