गुरुप्रसाद के बेटे पवन ने बताया कि उनके पिता गांव के बाहर मंदिर पर कुटिया बनाकर रहते थे। वह फल बेचने का काम भी करते थे। सोमवार रात सोते समय उनका हाथ बगल में रखी फल की टोकरी में पड़ गया। उसमें बैठे सर्प ने उन्हें डस लिया। गुरुप्रसाद ने पत्नी रामप्यारी को मामले की जानकारी दी। पवन ने पिता के कहने पर झाड़फूंक वालों को बुलाया, पर वे कुछ नहीं कर पाए। पवन पिता को लेकर सीएचसी मोहनलालगंज पहुंचे, जहां से बुजुर्ग को सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया। पवन के मुताबिक सिविल से भी डाक्टरों ने ट्रॉमा सेंटर भेज दिया, जहां मंगलवार सुबह पिता की मौत हो गई। पवन पिता का शव लेकर घर लौट आए। इसी बीच झाड़ फूंक करने वालों की टोली फिर गुरुप्रसाद के घर पहुंच गई। टोली ने बुजुर्ग को जिंदा करने का दावा किया और फिर से झाड़ फूंक शुरू कर दी। करीब छह घंटे तक झाड़फूंक चलता रहा, लेकिन कोई लाभ नहीं मिला। गांव के कुछ बुद्धिजीवियों ने परिजनों को समझाया, जिसके बाद शव का अंतिम संस्कार किया गया।
बुजुर्ग ने सांप को भर लिया था झोली में
ग्रामीणों ने बताया कि गुरुप्रसाद को सोमवार रात जब सांप ने काटा तो उन्होंने सांप को पकड़कर झोली में भर लिया। बुजुर्ग को अंधविश्वास था कि जब तक सांप उनके पास है तब तक उनकी मौत नहीं हो सकती है। यही वजह है कि परिजन भी उनकी बातों में आ गए। ग्रामीणों का कहना है कि अगर सांप के काटते ही उन्हें अस्पताल ले जाया गया होता तो गुरुप्रसाद की जान नहीं जाती।