राजधानी में कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन को लेकर अगले 15 दिन अहम हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस दौरान नए स्ट्रेन से पीड़ित मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं हुई तो वायरस निष्प्रभावी साबित हो सकता है। मालूम हो कि राजधानी में कोरोना का पहला मरीज 11 मार्च को मिला था।
शुरुआती दौर में एक से दो मरीज मिलते रहे और दो अप्रैल को एक साथ 12 लोग पॉजिटिव पाए गए। 13 अप्रैल से स्थानीय लोगों में वायरस मिलना शुरू हुआ। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रिटेन से लौटे लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। फिर भी ब्रिटेन में मिला स्ट्रेन यहां पहुंचता है तो उसका असर 15 दिन बाद दिखना शुरू हो जाएगा।
यदि इसी तरह निरंतर सावधानी बरती गई और वायरस का ग्राफ गिरता चला गया तो माना जा सकता है कि वायरस का असर लगातार कम हो रहा है। स्क्रीनिंग में लगे डॉक्टर एमके सिंह का कहना है कि करीब 15 दिन को विशेष टारगेट मानकर स्क्रीनिंग की जा रही है। जिन लोगों में भी लक्षण पाए जा रहे हैं उनके संपर्क में आने वालों की भी जांच कराई जा रही है। विदेश से लौटने वाले लोगों को लेकर पूरी टीम अलर्ट है। पॉजिटिव मिलने वालों की संख्या में भी लगातार गिरावट हो रही है।
मरीजों की संख्या में लगातार गिरावट जारी
लोहिया संस्थान के कोविड हॉस्पिटल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. श्रीकेश सिंह का कहना है कि 18 सितंबर के बाद मरीजों की संख्या में लगातार गिरावट हो रही है। करीब साढ़े माह से यह दौर बरकरार है। यदि 15 दिन और वायरस की स्थिति में गिरावट होती रही तो मान लिया जाएगा कि अब संक्रमण निचले पायदान पर है। जहां तक नए स्ट्रेन की बात है तो उसका भी प्रदेश में मिले मरीजों में असर उतना गंभीर नहीं दिखा है जितना ब्रिटेन के मरीजों में।