लखनऊ। हैदर कैनाल पर करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से बने 120 एमएलडी क्षमता के नए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की चार में से एक मशीन 21 दिन में ही खराब हो गई है। इससे एसटीपी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहा और गंदा पानी गोमती में जाकर पानी की गुणवत्ता खराब कर रहा है। ऐसे में एसटीपी के निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। एक सप्ताह से सच्चाई को छुपाए जल निगम ने यह खामी तब बताई, जब अमर उजाला ने शुक्रवार को एसटीपी संचालन में फर्जीवाड़े की खबर प्रमुखता प्रकाशित की।
यह एसटीपी एक जून को चालू हुआ था। इसके बाद 21 जून को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी जेपी मौर्य ने इसका निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान एसटीपी तय क्षमता 120 की जगह 80 एमएलडी पर चलता मिला था। यह भी सामने आया था कि सीवर और नाले के पानी को शोधित करने के लिए लगे छह एसबीआर (सर्विस बेंच रिएक्टर) में दो बंद थे और खाली भी थे। ऐसे में गंदा पानी अभी तक सीधे गोमती नदी में जा रहा है।
इस पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जल निगम (नगरीय) के अधीक्षण अभियंता को नोटिस भी जारी किया है। इसके बाद भी जल निगम के जिम्मेदार मामले को दबाए रहे। जल निगम के मुख्य अभियंता शमीम अख्तर से बृहस्पतिवार को इस मामले में जानकारी ली गई तो उन्होंने मामले से अनभिज्ञता जताई, जबकि एसटीपी संचालन के मुखिया वही हैं।
फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद बोले एक मशीन हो गई खराब
एसटीपी संचालन में फर्जीवाड़े का खेल सामने आने के बाद जल निगम के मुख्य अभियंता शमीम अख्तर ने शुक्रवार को सफाई देते हुए कहा कि एसटीपी में नाले से आने नाले पानी को पंप कर टैंक तक लाने के लिए चार स्क्रीन मशीनें लगी हैं। ये सीवर के साथ आने वाले कचरे को अलग करती हैं, लेकिन नाले के पानी के साथ गद्दे जैसे बड़े कचरे भी आ रहे हैं, इसके कारण ही एक स्क्रीन मशीन खराब हो गई है। इसी वजह से प्लांट पूरी क्षमता से नहीं चल रहा है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि नाले में इस तरह का कचरा तो पहले भी आता था तो फिर अब यह बहाना क्यों बनाया जा रहा है। जिस तरह से कचरा आ रहा है, उसे देखते हुए मशीनें क्यों नहीं लगाई गईं।
मरम्मत में भी लापरवाही
21 जून को ही यह पता चल गया था कि एसटीपी की एक मशीन खराब है उसके बाद भी जल निगम ने मरम्मत में जानबूझकर लापरवाही की। अभी मरम्मत की जिम्मेदारी एसटीपी लगाने वाली फर्म की है, उस पर कार्रवाई के बजाय उसे बचाया जा रहा है। जल निगम के मुख्य अभियंता ने कहा कि ठेकेदार फर्म को सूचना भेजी गई है। एक-दो दिन में वह मरम्मत के लिए आएगी।
I
I
Iअभी छह महीने का ट्रायल रन है। इस दौरान जो कमियां सामने आएंगी, उनमें सुधार किया जाएगा। I
I- शमीम अख्तर, मुख्य अभियंता जल निगमI