लखनऊ। बाबासाहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में शोध की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू हुई 10 दिवसीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने सुझाव दिए। कहा कि किसी भी शोधार्थी में जितनी ज्यादा जिज्ञासा होगी, उसका शोध उतना गुणवत्तापूर्ण होगा।
विशेषज्ञों ने सफल शोधार्थी बनने के लिए तीन गुर पहला जिज्ञासा, दूसरा समाज के प्रति जागरूकता और तीसरा नैतिक आचार का होना बताया। विवि के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने समाज और विश्वविद्यालय के परस्पर संबंध पर बल देते हुए अनुसंधान को समाज की समस्याओं से जोड़कर शोध कार्य करने की जरूरत पर प्रकाश डाला। प्रो. मित्तल ने शोधार्थियों और शिक्षकों को संदेश दिया कि वे शोध में मौलिकता तथा प्रामाणिकता को प्राथमिकता दें। उन्होंने वक्तव्य में प्रज्ञा, शील और करुणा को तीन ध्येय वाक्य बताकर शोधकार्य में शामिल करने की प्रेरणा दी।
प्रो. अनिल कुमार शुक्ल ने ''''स्वयं के बोध'''' एवं ''''संसार के शोध'''' के रूप को परिभाषित किया। प्रो. राजशरण शाही ने कहा, कोई राष्ट्र कितना आगे बढ़ेगा यह उसके शिक्षक की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। यह भी कहा कि शिक्षा में नवाचार के लिए शोध का अत्यंत महत्त्व है। शोध को केवल डिग्री का माध्यम न बनाया जाए।