रमजान में होने वाली तरावीह की विशेष नमाज में हाफिज कुरान के पारे बगैर देखे सुनाते हैं। नमाज के दौरान कुरान की तिलावत में किसी भी तरह की चूक न हो, हाफिजों ने इससे बचने के लिए कुरान की मश्क (अभ्यास) तेज कर दी है।
दिन भर रोजा रखने के बाद मुसलमान अपनी सहूलियत के मुताबिक राजधानी में अलग-अलग मस्जिदों में तरावीह की नमाज अदा करेंगे। रमजान का चांद दिखने के साथ मस्जिदों में शुरू होने वाली नमाज-ए-तरावीह का दौर पूरे एक माह तक चलता रहेगा।