लखनऊ। महापौर के सरकारी आवास पर रविवार को पार्टी पार्षदों की बैठक तो एसआईआर को लेकर हुई, मगर इस पर छाया महापौर और नगर आयुक्त के बीच चल रही तनातनी की ही रही। बैठक में भाजपा के 80 में से करीब 55 पार्षदों के शामिल होने की चर्चा है, जिसको लेकर यह माना जा रहा है कि अब महापौर पार्षदों को एकजुट कर अपनी ताकत जताने में लगी हैं, क्योंकि अभी तक भाजपा के ज्यादातर पार्षद अलग-अलग मसलों को लेकर उनसे दूरी बनाए हुए थे और उन्हें नगर आयुक्त के पाले में माना जा रहा था।
बैठक में ज्यादातर पार्षदों ने यह मसला उठाया कि विवाद के कारण विकास कार्य ठप हो रहे हैं। इससे बहुत समस्या हो जाएगी। विवाद के कारण पुनरीक्षित बजट भी अटका हुआ है। इसे पास नहीं किया जाएगा तो आगे के काम भी नहीं हो पाएंगे। ऐसे में पहले कार्यकारिणी और फिर सदन की बैठक बुलाई जाए। इसके लिए पार्षदों ने महापौर पर दबाव भी बनाया।
जानकारों ने बताया कि महापौर ने कहा कि अब बैठक तभी होगी, जब नगर आयुक्त पहले से पास प्रस्तावों पर अमल की रिपेार्ट देंगे। इस बीच कुछ पार्षदों ने कहा कि बैठक बुलाई जाए और उसमें अफसरों से बात की जाए। जिस पर कुछ लोगों ने यह सुझाव दिया कि उससे पहले नगर आयुक्त के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया जाए और यह आरोप लगाया जाए कि वह जनप्रतिनिधियों की सुन नहीं रहे और कार्यकारिणी और सदन में पास प्रस्तावों पर अमल नहीं करा रहे हैं।
सूत्रों ने कहा कि महापौर के सरकारी आवास पर हुई बैठक एक तरह से नगर आयुक्त के खिलाफ उनका शक्ति प्रदर्शन है। अब पार्षदों को एकजुट कर वह नगर आयुक्त को घेरने की तैयारी में हैं, क्योंकि अभी तक ज्यादातर पार्षद उनके साथ नहीं दिख रहे थे। सूत्राें ने यह भी कहा कि पार्षद भी यह जानते हैं कि महापौर से मिलकर न चलने में उनका नुकसान हो सकता है। ऐसे में वह उनके साथ जा रहे हैं।
वार्ड स्वच्छता समिति बनाने पर भी हुई बात
बैठक में स्वच्छ पर्यावरण समिति और वार्ड समितियों के गठन पर भी विचार-विमर्श हुआ। महापौर ने बताया कि प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना के निर्देशानुसार प्रत्येक वार्ड में पार्षद की अध्यक्षता में वार्ड समिति का गठन होना अनिवार्य है। सभी पार्षदों से एक सप्ताह के भीतर अपने-अपने वार्डों में समिति के सदस्यों के नाम प्रस्तुत करने को कहा गया है।
मतदाता सूची से हटवाए जाएंगे गैर जरूरी नाम
बैठक में स्पष्ट किया गया कि ऐसे मतदाताओं के नाम सूची से हटवाए जाएंगे जो अब लखनऊ में निवास नहीं करते हैं। कई लोग नौकरी व्यवसाय या अन्य कारणों से लखनऊ आए और बाद में यहां से स्थानांतरित होकर चले गए, मगर उनके नाम अब भी मतदाता सूची में दर्ज हैं। शहर में रहने वाले उन व्यक्तियों के नाम जिन्होंने असम राज्य के निवासी होने का दावा करते हुए यहां मतदाता पंजीकरण कराया है, उन्हें संबंधित एनआरसी दस्तावेजों के पूर्ण और प्रामाणिक सत्यापन के बाद ही मतदाता सूची में शामिल किया जाए।
Iनागरिक सहभागिता और जनप्रतिनिधियों के संयुक्त सहयोग से ही शहर की स्वच्छता, प्रशासनिक दक्षता और विकास कार्यों में सुधार किया जा सकता है। बैठक में एसआईआर और स्वच्छता समितियों को लेकर विशेष रूप से बात हुई। शक्ति प्रदर्शन जैसी कोई बात नहीं है।I
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- सुषमा खर्कवाल, महापौरI