इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने श्रीराम एयरपोर्ट मामले में धर्मपुर शहादत गांव के सौ से अधिक किसानों की याचिका पर अयोध्या के डीएम अनुज कुमार झा व उपजिलाधिकारी सदर और सदर तहसीलदार को कोर्ट के समक्ष 29 जून को वीडियो काफ्रेंसिंग के माध्यम से तलब किया है। कोर्ट ने मामले में सख्त रुख अख्तियार कर इन अधिकारियों से पूछा है कि वे किस मानदंड, किस दर और किस नियम कानून के तहत जमीन ले रहे हैं? इसको साफ तौर पर उस रोज बताएं।
अदालत ने यह भी पूछा है कि आखिरी बार वहां सर्किल रेट कब संशोधित किया गया था। किसानों को राहत देते हुए कोर्ट ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि अगर जमीन अधिग्रहीत नहीं की गई हो तो जब तक याचिकाकर्ता अपनी सहमति से जमीन बेचने के लिए तैयार नहीं होते तब तक उनको इसके लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है और न ही याचिकाकर्ता इसके लिए विवश होंगे।
न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की खंडपीठ ने यह अहम आदेश पंचराम प्रजापति सहित सौ से अधिक किसानों की याचिका पर दिया। याचियों का आरोप है कि बिना अधिसूचना के धर्मपुर शहादत गांव के किसानों की जमीनों का अधिग्रहण किया जा रहा है। ऐसा करके उनके अधिकारों का हनन किया जा रहा है। यह भी कहा कि हवाई अड्डे के निर्माण में प्रभावित किसानों के साथ उचित व्यवहार किया जाए क्योंकि उनकी संपत्ति जा रही है। साथ ही अधिग्रहण संबंधी वर्ष 2013 के कानून का पालन भी न किए जाने की दलील दी गई।
यचियों के अधिवक्ता ने यह भी कहा कि जमीन लेने का कोई मानदंड नहीं बनाया गया है। प्रशासन किस दर से जमीन ले रहा है, इसका कोई दिशा-निर्देश नहीं जारी किया गया है। प्रशासन मनमानी कर किसानों को अपर्याप्त दर पर जमीनों को बेचने के लिए मजबूर कर रहा है। लिहाजा इस पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए।
कोर्ट ने राज्यसरकार के वकील से कहा कि वे अपने दफ्तर से इन अफसरों को वीडियो काफ्रेंसिंग से जुड़ने का लिंक भेज देंगें या कार्यालय से ही 29 जून को उक्त अधिकारी वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिये जवाब देकर अपनी बात को कोर्ट के समक्ष पेश होकर रखें। मामले की अगली सुनवाई 29 जून को होगी।