लखनऊ। राज्य महिला आयोग में शुक्रवार को साइबर क्राइम व एआई विषय पर आधारित कार्यशाला और मासिक बैठक का आयोजन किया गया। इसमें कई जिलों से आयोग की सदस्यों ने भाग लिया। राजधानी सहित मेरठ, कौशांबी, प्रतापगढ़, बहराइच, गोंडा की सदस्यों ने साइबर अपराध पर त्वरित कार्रवाई का मुद्दा उठाया।
मेरठ से मीनाक्षी भराला, कौशांबी और प्रतापगढ़ से प्रतिभा कुशवाहा, लखनऊ, बहराइच और गोंडा से डॉ. प्रियंका मौर्या ने कहा कि थानों में पीड़िताओं की शिकायतों की अनदेखी की जा रही है। पुलिस जब तक कार्रवाई करती है, तब तक पीड़िता के चरित्र का हनन हो चुका होता है। ऐसे मामलों में कार्रवाई तेज करने की मांग उठाई। कार्यशाला में मुख्य वक्ता सहायक पुलिस आयुक्त अरुण कुमार ने साइबर अपराध के बचाव की जानकारी दी। इस दौरान आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान, उपाध्यक्ष अपर्णा यादव, चारू चौधरी व सचिन दीक्षित समेत अन्य मौजूद रहे।
तीन साल से थाने का चक्कर लगा रही पीड़िता
आयोग की सदस्य प्रतिभा कुशवाहा ने कौशांबी के एक केस का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2022 से एक पीड़िता न्याय के लिए थाने का चक्कर लगा रही है। अभी तक उसकी एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई। सोशल मीडिया पर पति ने ही उसकी फेक आईडी बनाकर अश्लील फोटो अपलोड की थी। जब वह आयोग में न्याय के लिए पहुंची थी तो उसकी स्थिति ऐसी थी कि वह आत्महत्या करने की बात कह रही थी। छह बार वह थाने में प्रार्थनापत्र दे चुकी है, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। पुलिस प्रशासन का कहना है कि दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज तो कर लिया गया है। आज भी उसे और उसके भाई को जान से मारने की धमकी मिल रही है। प्रतिभा के जरिये मामला संज्ञान में आने पर सहायक पुलिस आयुक्त अरुण कुमार ने कार्रवाई का आश्वासन दिया।
कार्यशाला में मौजूद महिला आयोग की अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्य।
कार्यशाला में मौजूद महिला आयोग की अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्य।
कार्यशाला में मौजूद महिला आयोग की अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्य।
कार्यशाला में मौजूद महिला आयोग की अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्य।
कार्यशाला में मौजूद महिला आयोग की अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्य।
कार्यशाला में मौजूद महिला आयोग की अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्य।