लखनऊ। केजीएमयू में गंभीर और आपात स्थिति में पहुंच रहे मरीजों की जांच व्यवस्था सवालों के घेरे में है। न्यूरोलॉजी के मरीज को तत्काल एमआरआई की जरूरत थी तो पथरी से पीड़ित मरीज के लिए डॉक्टर ने तत्काल सीटी स्कैन कराने को कहा था, लेकिन रेडियोडायग्नोस्टिक सेंटर पर दोनों को तत्काल जांच नहीं मिल सकी। एक मरीज को तीन दिन बाद की तारीख दे दी गई, जबकि दूसरे के तीमारदार को काउंटर से टरका दिया गया। शुक्रवार को सेंटर के बाहर मरीज और उनके तीमारदार जांच के लिए भटकते नजर आए। एक मरीज सड़क पर ही लेटा रहा।
बार-बार हो रहा था बेहोश, तीन दिन बाद की दी एमआरआई डेट
आलमबाग निवासी सतेंद्र तिवारी बृहस्पतिवार को घर में अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। परिजन उन्हें आनन-फानन में ट्रॉमा सेंटर ले गए। वहां से ओपीडी में न्यूरोलॉजी विभाग में दिखाने की सलाह दी गई। न्यूरोलॉजी के चिकित्सकों ने एमआरआई जांच लिखी। इसके बाद रेडियोडायग्नोस्टिक सेंटर से उन्हें तीन दिन बाद की तारीख दे दी गई। परिजनों के मुताबिक, सतेंद्र लगातार बेहोश हो रहे थे। उनकी पत्नी नीलू बेसुध पति को स्ट्रेचर पर लिटाकर सेंटर के बाहर घंटों खड़ी रहीं और जल्द जांच कराने के लिए स्टाफ से गुहार लगाती रहीं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
तत्काल सीटी स्कैन की सलाह, काउंटर से टरकाया
वहीं, सेंटर के सामने सड़क पर पथरी की समस्या से पीड़ित रायबरेली निवासी रघुनाथ लाचार पड़े रहे। उनके बेटे रणविजय सिंह ने बताया कि यूरोलॉजी की ओपीडी में चिकित्सकों ने तत्काल सीटी स्कैन कराने की सलाह दी थी। जांच के लिए रेडियोडायग्नोस्टिक सेंटर पहुंचे तो काउंटर पर तत्काल जांच कराने से मना कर दिया गया। उन्होंने मरीज की गंभीर हालत का हवाला देकर जल्द जांच की गुहार लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
Iगंभीर मरीजों की तत्काल जांच किए जाने का स्पष्ट नियम है। पूरे प्रकरण की शनिवार को जांच कराई जाएगी। I
I- डॉ. केके सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयूI