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Lucknow News: लीडा पर बकाया 109 करोड़ रुपये का ब्याज होगा माफ, सस्ती होगी जमीन

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लखनऊ। लखनऊ औद्योगिक विकास प्राधिकरण (लीडा) पर बकाया करीब 109 करोड़ रुपये का ब्याज शासन ने माफ कर दिया है। इसका सीधा लाभ उद्यमियों को मिलेगा, क्योंकि इतनी बड़ी रकम माफ करने से डेवलपमेंट शुल्क और जमीन की कीमत कम होगी।
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वर्ष 2021 में लीडा का विलय उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) में कर दिया गया था। यूपीसीडा की पिछले हफ्ते बोर्ड बैठक में ब्याज का बोझ खत्म करने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे अनुमोदित कर दिया गया। इस निर्णय से हजारों उद्यमियों को इकाई लगाने के लिए औद्योगिक जमीन कम कीमत में मिलेगी। डेवलपमेंट शुल्क में भी कमी आएगी।
लखनऊ औद्योगिक विकास प्राधिकरण (लीडा) का गठन वर्ष 2005 में किया गया था। प्राधिकरण के गठन का उद्देश्य लखनऊ के आसपास औद्योगिक विकास के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा विकसित करना था। इसके तहत सड़क, बिजली, आवासीय सुविधाएं और वाणिज्यिक सुविधाओं के लिए 50 लाख रुपये प्रारंभिक पूंजी के रूप में 19 फीसदी सालाना ब्याज पर ऋण के रूप में दिए गए थे। दूसरे चरण में वर्ष 2006 में 24.50 करोड़ रुपये 19 फीसदी ब्याज पर लोन के रूप में दिए गए थे। वर्ष 2008 में 16 करोड़ की तीसरी किस्त 18 फीसदी ब्याज पर दी गई, लेकिन लीडा का कामकाज नहीं चला। इस पर वर्ष 2021 में लीडा का विलय यूपीसीडा में ‘जैसा है जहां है’ के आधार पर कर दिया गया।
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यूपीसीडा में विलय से पहले वर्ष 2021 तक लीडा पर कुल देनदारी करीब 85 करोड़ रुपये हो गई थी। इसके अलावा लीडा को शुरुआती दौर में दिए गए 41 करोड़ का बोझ भी यूपीसीडा को दिया गया। इसके अलावा कुल ऋण पर 109 करोड़ की देनदारी भी यूपीसीडा पर आ गई। इस पर यूपीसीडा ने ब्याज माफ करने या लोन देने की तारीख से लोन को ब्याज रहित करने का अनुरोध किया था। इस प्रस्ताव को शासन ने मंजूर कर लिया है।
लीडा के विलय के बाद लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों के औद्योगिक विकास की जिम्मेदारी यूपीसीडा को दी गई है। मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप लखनऊ को प्रदेश ही नहीं, देश के प्रमुख औद्योगिक हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। 109 करोड़ की देनदारी में राहत का सीधा लाभ उद्यमियों को कम डेवलपमेंट चार्ज और औद्योगिक भूखंडों की कीमतों में कमी के रूप में मिलेगा।
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-मयूर महेश्वरी, सीईओ, यूपीसीडा
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