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खुले नालों का खौफ : दो साल में कई जानें गईं, फिर भी सबक नहीं

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लखन की फाइल फोटो और नाले में पड़ा रिक्शा।
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लखनऊ। शहर में खुले नालों की लापरवाही एक बार फिर जानलेवा साबित हुई। बुधवार को हुई घटना पहली नहीं है। बीते दो वर्षों में खुले नालों में गिरने से कई लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन जिम्मेदार अब भी खुद को बेगुनाह बता रहे हैं।
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नगर निगम के जोनल अधिकारी रामेश्वर प्रसाद और जोनल अभियंता संजय पांडेय का कहना है कि इस हादसे में निगम की लापरवाही नहीं है, क्योंकि बड़े नालों को पूरी तरह ढंकना संभव नहीं होता, क्योंकि उनकी नियमित सफाई होती रहती है। सफाई का जिम्मा आरआर विभाग के पास है। वैसे भी पुलिस द्वारा खंगाले गए सीसीटीवी फुटेज में सामने आया है कि रिक्शा तेज रफ्तार में था। वहीं, सूचना मिलते ही नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और युवक को बाहर निकालने का प्रयास किया गया।
सवालों के घेरे में सुरक्षा दीवार

नाला करीब 10 फीट चौड़ा और 22 फीट गहरा है। यह नाला लोक निर्माण विभाग की नेशनल हाईवे विंग द्वारा बनाया गया था, जबकि सफाई नगर निगम कराता है। जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां सुरक्षा दीवार थी, लेकिन वह रिक्शे की टक्कर से टूट गई। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि इतनी गहराई वाले नाले की सुरक्षा दीवार इतनी कमजोर थी, जो हल्के टक्कर से धराशायी हो गई।
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हादसों की फेहरिस्त लंबी

जुलाई में ठाकुरगंज में खुले नाले में गिरने से एक व्यक्ति की मौत हुई।
चार महीने पहले सदर इलाके में हैदर कैनाल नाले में बहने से एक बच्चे की जान चली गई।
छह महीने पहले खुर्रम नगर में बड़े नाले में गिरने से एक बच्चे की मौत हुई।
दो साल पहले गोलागंज में बारिश के दौरान नाले में बहने से एक बच्चे की मौत हो गई।
जानकीपुरम विस्तार में खुले मैनहोल में गिरकर एक बच्चे की जान चली गई।
रकाबगंज में छह महीने पहले स्कूल से लौट रहा बच्चा खुले नाले में गिर गया था, जिसे लोगों ने समय रहते बचा लिया।
अगस्त में गोमतीनगर के हैनीमैन चौराहे के पास नाले का पत्थर टूटने से एक व्यक्ति गिरकर घायल हुआ था।

लखन की फाइल फोटो और नाले में पड़ा रिक्शा।

लखन की फाइल फोटो और नाले में पड़ा रिक्शा।

लखन की फाइल फोटो और नाले में पड़ा रिक्शा।

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