लखनउ। हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी के रवैये पर सख्त नाराजगी जताते हुए उन्हें व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में पेश होने का आदेश दिया है कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रथमदृष्टया प्रतीत होता है कि जिलाधिकारी सही जानकारी छिपा रहे हैं। इस मामले में कोर्ट ने डीएम के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी भी दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की एकलपीठ ने अखिलेश कुमार पटेल और एक अन्य की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
यह विवाद एक बिल्डर से करीब 66 लाख रुपये की बकाये राशि की वसूली से जुड़ा हुआ है। रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने वीएमएस बिल्ड टेक प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ आरसी जारी किया था। हाईकोर्ट ने अगस्त 2023 में ही जिलाधिकारी को तीन महीने के भीतर इस पूरी रकम को वसूलने के निर्देश दिए थे। तय समय-सीमा बीत जाने के बाद भी जब जिला प्रशासन ने रकम की वसूली नहीं की, तो याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अवमानना याचिका दाखिल की।
पिछली सुनवाई के दौरान न्यायालय ने जिलाधिकारी से जवाब तलब किया था कि अब तक यह वसूली क्यों नहीं हो पाई। साथ ही यह भी पूछा था कि जब संबंधित बिल्डर का चेक बाउंस हो गया था, तो उसके खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत मुकदमा क्यों नहीं दर्ज कराया गया। मामले की सुनवाई के दौरान डीएम की ओर से कोर्ट में एक शपथ पत्र दाखिल किया गया। न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया ने इस शपथ पत्र में पाया कि इसमें कोर्ट के पूछे गए बुनियादी सवालों का कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। प्रशासन के इस टालमटोल वाले रवैये पर कोर्ट ने असंतोष व्यक्त किया और जिलाधिकारी को 20 मई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होकर स्थिति स्पष्ट करने का फरमान सुनाया।