लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 12 वर्ष से विचाराधीन एक जनहित याचिका के मामले में विभागीय उदासीनता पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। हाईकोर्ट ने कृषि विभाग के अपर मुख्य सचिव व कृषि निदेशक को 30 जनवरी को वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश होने का आदेश दिया है। साथ ही प्रमुख सचिव कृषि और कृषि निदेशक को मामले में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
यह मामला राजधानी के पास मैंगो बेल्ट में पेड़ों की जियो-टैगिंग करवाने से जुड़ा है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश वर्ष 2013 में दाखिल जनहित याचिका पर दिया है। इसमें लखनऊ के पास मैंगो बेल्ट में आम के पेड़ों की जियो टैगिंग समेत इनके अवैध कटान का मुद्दा उठाया गया है। इस मामले में 2014 में ही कोर्ट ने संबंधित राज्य प्राधिकारियों को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था।
कोर्ट के आदेश पर 13 जनवरी को बागवानी विभाग के अपर मुख्य सचिव बीएल मीना, प्रमुख सचिव वन अनिल कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी एवं जिला वन अधिकारी सितांशु पांडेय पेश हुए थे। बीएल मीणा ने कोर्ट को बताया कि आम के पेड़ों की जियो टैगिंग का काम कृषि विभाग का है। इसपर कोर्ट ने कहा कि 11 वर्ष बाद भी अदालत यह जानने की कोशिश कर रही है कि जियो टैगिंग किसको करनी है। यह स्थिति दयनीय है। इस टिप्पणी और आदेश के साथ अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 30 जनवरी को नियत की है।