लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अयोध्या रोड पर पॉलीटेक्निक से किसान पथ तक प्रस्तावित फ्लाईओवर के निर्माण में हो रही देरी पर सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने एलडीए और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे परियोजना की प्रगति रिपोर्ट जवाबी हलफनामे के माध्यम से दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई अब फरवरी पहले सप्ताह में होगी।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश अवध बार एसोसिएशन की वर्ष 2017 की जनहित याचिका पर दिया। याचिका में हाईकोर्ट भवन के पास और अयोध्या रोड पर आए दिन लगने वाले जाम के मुद्दे को उठाया गया था। सुनवाई के दौरान, पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव ने जवाबी हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को पॉलीटेक्निक चौराहे से किसान पथ/इंदिरा नहर तक प्रस्तावित फ्लाईओवर निर्माण योजना की जानकारी दी। एलडीए के अधिवक्ता ने बताया कि प्रस्तावित फ्लाईओवर के निर्माण के लिए बजट की मंजूरी राज्य सरकार से मिलनी बाकी है।
इन दलीलों के बाद, कोर्ट ने एलडीए और पीडब्ल्यूडी के अफसरों को मामले में अगली सुनवाई तक निर्माण की प्रगति और आगे की जाने वाली कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा हलफनामे पर दाखिल करने का निर्देश दिया। नगर निगम के वकील भी सुनवाई के दौरान मौजूद रहे।
ट्रैफिक समाधान के लिए पूर्व में दिए गए थे निर्देश
इसी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 12 अगस्त को कमता और पॉलीटेक्निक चौराहे से किसान पथ तक जाम की समस्या के समाधान के लिए संबंधित विभागों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। कोर्ट को बताया गया था कि मंडलायुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि पॉलीटेक्निक से किसान पथ तक मेट्रो रेल का संचालन व्यावहारिक नहीं होगा। मेट्रो रूट को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान से इकाना स्टेडियम तक चलाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। वहीं, राज्य सरकार की ओर से यह पक्ष रखा गया था कि यदि पॉलीटेक्निक से किसान पथ तक मेट्रो चलाई भी जाती है, तो भी इस स्थान पर वाहनों के सुचारू आवागमन के लिए फ्लाईओवर का निर्माण आवश्यक होगा। इस पर कोर्ट ने प्रमुख सचिव, पीडब्ल्यूडी को मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था।