सरगना के इस खुलासे के बाद दोनों एजेंसियों की मिलीभगत की गहनता से छानबीन की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि इन एजेंसियों में तैनात अधिकारियों की संलिप्तता की भी जांच की जाएगी। एसटीएफ में एएसपी विशाल विक्रम सिंह का कहना है कि एक वर्ष से गिरोह जाली आईडी से आयुष्मान कार्ड बना रहा था। ठगों ने एक वर्ष में पांच हजार से अधिक अपात्रों के कार्ड बनाए थे। इससे सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान पहुंचा है। गिरोह से इंप्लीमेंटेशन सपोर्ट एजेंसी के एक्जीक्यूटिव सुजीत कनौजिया, सौरभ मौर्य और विश्वजीत हर माह रुपये लेते थे। अब तक की छानबीन में एजेंसी के अफसर की संलिप्तता सामने आई है।
गिरोह के सरगना ने बताया कि वह एक अपात्र कार्ड बनाने का 10 हजार रुपये लेता था। एसटीएफ का कहना है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों और उनके करीबियों के बैंक खाते खंगाले जा रहे हैं। कुछ आरोपियों के बैंक खातों से लेनदेन की पुष्टि हुई है। गिरोह के सरगना से जुड़े कुछ अन्य लोगों के बारे में भी एसटीएफ को जानकारी मिली है, जिनकी तलाश की जा रही है। उल्लेखनीय है कि एसटीएफ ने सात लोगों को गिरफ्तार कर गिरोह का भंडाफोड़ किया था।