लखनऊ। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में प्रसूताओं को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। टेंडर के माध्यम से यह काम निजी कंपनी को सौंपा गया था, मगर निजी कंपनी ने यह काम पेटी ठेकेदारों को बांट दिया है।
स्वास्थ्य विभाग ने सीएचसी में प्रसूताओं के खाने-नाश्ते के लिए एक निजी कंपनी को टेंडर दिया था, जिसके तहत सीएचसी परिसर में ही खाना बनवाया जाना था। हालांकि, ठेकेदार ने नियमों का उल्लंघन कर यह काम पेटी ठेकेदारों को सौंप दिया है, जो खाना बाहर से मंगवा रहा है। माल, मलिहाबाद, काकोरी, सिल्वर जुबली, रेडक्रॉस, अलीगंज समेत अन्य सीएचसी पर यही हाल है। इस खाने की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है, डाइट के अनुसार भी यह ठीक नहीं। इसकी शिकायतें प्रसूताएं कई बार कर चुकी हैं। वह यह भोजन लेने से कतरा रही हैं।
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए गए तो कंपनी को नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी।
रसोइयों को भुगतान न मिलने से काम ठप
कई सीएचसी में ठेकेदार रसोइयों को समय पर भुगतान भी नहीं कर रहा है, जिसके कारण रसोइयों ने काम बंद कर दिया है। जिले में कुल 20 सीएचसी हैं, जहां एनएचएम प्रति प्रसूता प्रतिदिन 135 रुपये का भुगतान करता है। पहले सीएचसी में ही खाना बनता था, लेकिन अब पेटी ठेकेदारों के जरिये बाहर से खाने की आपूर्ति की जा रही है।
अलीगंज की किचन बंद, बाहर से आ रहा खाना
अलीगंज सीएचसी में रसोइयों को पांच महीने से भुगतान नहीं मिला है, जिससे उन्होंने काम बंद कर दिया और अब बाहर से खाना मंगवाया जा रहा है। सीएचसी प्रभारी डॉ. हेमंत के अनुसार, किचन का निर्माण कार्य चल रहा है, जो पूरा होने के बाद सीएचसी में ही खाना बनवाया जाएगा।