लखनऊ। फूल खिले हैं लिखा हुआ है तोड़ो मत, और मचलकर जी कहता है छोड़ो मत। शायर अमीक हनफी का यह शेर आज जनभवन (राजभवन) में लगी तीन दिवसीय 57वीं प्रादेशिक फल, शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी के दौरान बिल्कुल सटीक बैठ रहा था। शुक्रवार को शुरू हुई प्रदर्शनी में एक से बढ़कर सैकड़ों किस्म के खूबसूरत फूल देखकर हर कोई यही सोच रहा था कि इन्हें छूकर जरूर देखें। प्रदर्शनी का उद्घाटन राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया। इस दौरान पांच फीट लंबी लौकी से लेकर 50-60 किलो तक के कद्दू और कुम्हड़े को देख हतप्रभ रह गए।
राज्यपाल ने कहा कि पुष्प सज्जा केवल सजावट तक सीमित न रहकर समाज में सकारात्मक संदेश देने वाली होनी चाहिए। उन्होंने बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अधिक अवसर दिए जाने पर बल दिया और प्रधानमंत्री के ''परीक्षा पे चर्चा'' कार्यक्रम को उपयोगी बताया। राज्यपाल ने खेती, पशुपालन और उद्यानिकी में वैज्ञानिक ज्ञान के व्यावहारिक उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने ड्रिप सिंचाई, डेयरी विकास, महिला सहभागिता और तकनीक आधारित कृषि की महत्ता बताई। साथ ही, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, बचत की आदत विकसित करने और पोषणयुक्त आहार को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिया कि कृषि विश्वविद्यालयों को अन्य राज्यों के सफल मॉडलों से सीख लेकर उन्हें उत्तर प्रदेश में लागू करना चाहिए।
राज्यपाल ने गुजरात की बनास डेयरी का भ्रमण कर कार्यप्रणाली सीखने का सुझाव भी दिया। उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि यह प्रदर्शनी राज्य में उद्यानिकी के क्षेत्र में हो रहे निरंतर विकास और नवाचार का एक सशक्त उदाहरण है। कार्यक्रम में विशेष कार्याधिकारी डॉ. सुधीर महादेव बोबडे, कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव (उद्यान) बीएल मीणा, मंडल आयुक्त विजय विश्वास पंत, निदेशक उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण भानु प्रकाश राम आदि मौजूद रहे।
अब तीन नहीं, चार दिन खुली रहेगी प्रदर्शनी
प्रदर्शनी की अवधि एक दिन बढ़ाने की घोषणा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि सोमवार को भी स्कूल के बच्चे और अन्य दर्शक इसका अवलोकन कर सकेंगे। इस दौरान, राज्यपाल ने प्रदर्शनी पर डाक विभाग के माध्यम से प्रदर्शनी पर आधारित विशेष आवरण, विरूपण तथा पिक्चर कार्ड का विमोचन भी किया। उद्यान विभाग द्वारा प्रादेशिक फल, शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी पर आधारित स्मारिका का विमोचन भी किया गया। किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए।
फूलों की आकृतियों ने चुराया दिल, खूब लीं सेल्फी
फोटो खूब सारी हैं।
प्रदर्शनी के दौरान फूलों से बनी आकृतियों ने सभी आगंतुकों का दिल चुरा लिया। फूलों से बनी विशालकाय भगवान श्रीकृष्ण की आकृति हो या फिर गोवर्धन पर्वत का दृश्य और राम दरबार, सभी ने दर्शकों को आकर्षित किया। इसके अलावा गाय-बछड़े की आकृति और संविधान के दृश्यों ने मन मोह लिया। इस बीच भारत माता का चित्र और अगल-बगल बंकिमचंद्र चटर्जी और रविंद्र नाथ टैगोर की आकृतियों के पास दर्शकों की खूब भीड़ फोटो खिंचवाने को लेकर लगी रही। इस दौरान लोगों ने खूब सेल्फी लीं और मोबाइल से वीडियो बनाए। शाक-भाजी और फलों के स्टॉलों पर भी खूब भीड़ रही। यहां पांच फीट की लौकी और भारी भरकम कद्दू व अन्य सब्जियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। इसके अलावा अलग-अलग उत्पादों से सजे स्टॉलों पर भी खरीदारों की खूब भीड़ रही।
जनभवन में लगी प्रादेशिक फल, शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी।
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