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Lucknow News: रोजेदारों से रुखसत हुआ रहमत का पहला अशरा

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लखनऊ। रमजान-उल-मुबारक का पहला रहमत का अशरा (10 दिन) मंगलवार को रुखसत हो गया। रोजेदारों ने रब की रहमत हासिल करने के लिए रमजान के पहले 10 दिन इबादत में गुजारी। रमजान का दूसरा अशरा मगफिरत का है। लिहाजा दूसरे अशरे यानि 10 दिनों में रोजेदारों में ज्यादा से ज्यादा इबादत करने की होड़ बढ़ेगी।
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रमजान-उल-मुबारक के 30 दिनों की बरकत को 10-10 दिन के तीन अशरों में बांटा गया है। पहला अशरा रहमत का, दूसरा मगफिरत और तीसरा अशरा जहन्नम से आजादी का है। रमजान के पहले अशरे में रोजेदारों ने ज्यादा से ज्यादा नमाज अदा की और कुरान की तिलावत कर अल्लाह को राजी करने के लिए अपना हर लम्हा इबादत में गुजारा।
रहमत का अशरा संपन्न होने पर ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने रोजेदारों से दूसरे अशरे में अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगने की अपील की। वहीं, मौलाना अबुल इरफान मियां फिरंगी महली ने कहा कि रमजान के दूसरे मगफिरत के अशरे में अल्लाह अपने नेक बंदों के गुनाहों को माफ कर देता है। हमें अपने रब को राजी करने के लिए इबादत बढ़ा देनी चाहिए। मस्जिद सुब्हानियां के इमाम कारी मोहम्मद सिददीक ने कहा कि रमजान में जन्नत के सभी दरवाजे खोल दिए जाते हैं और जहन्नम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि रमजान के महीने में हर नेकी का सवाब सत्तर गुना बढ़ा दिया जाता है।
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तीन पारों की तरावीह मुकम्मल होने पर हाफिज का सम्मान

मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित हाजी हरमैन शाह दरगाह मस्जिद में तीन पारों की तरावीह पढ़ाने वाले हाफिज मोहम्मद फैजान और हाफिज मोहम्मद अरसलान को फूलमाला पहनाकर सम्मानित किया गया। दरगाह के मुतवल्ली पीरजादा शेख राशिद अली मीनाई ने कहा कि अल्लाह ने रमजान के मुकद्दस महीने मुरान मजीद को नाजिल किया है। उन्होंने कहा कि वे लोख खुशनसीब हैं जिन्होंने तरावीह की नमाज में शामिल होकर कुरान सुना है।
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