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Lucknow News: हाथ नहीं परिवार के जीने का सहारा छिन गया

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अस्पताल में भर्ती धीरज।
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लखनऊ। बिजली की लाइन की मरम्मत के दौरान करंट से झुलसे दुबग्गा विद्युत उपकेंद्र के संविदाकर्मी धीरज कुमार (30) के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। 10 साल पहले पिता की मौत के बाद धीरज ही परिवार का एकमात्र सहारा थे। इस हादसे में चिकित्सकों को उनके दोनों हाथ काटने पड़े हैं। इससे न केवल धीरज की जिंदगी बदल गई है, बल्कि परिवार की खुशियां भी उजड़ गई हैं।
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27 सितंबर की शाम करीब 7 बजे धीरज 11 हजार केवी लाइन पर काम कर रहे थे। इसी दौरान वे करंट की चपेट में आ गए और नीचे गिर पड़े। झटके से दोनों पैर में फ्रैक्चर हो गया, सिर में भी गहरी चोट आई। उन्हें गंभीर हालत में ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां संक्रमण के खतरे के चलते डॉक्टरों को उनके दोनों हाथ काटने पड़े। फिलहाल हालत नाजुक है और इलाज जारी है।
परिवार ने थाने में जेई, एसडीओ और आउटसोर्सिंग कंपनी के खिलाफ लापरवाही की शिकायत दर्ज कराई है। चौकी इंचार्ज कुलदीप यादव के मुताबिक, मामले की जांच अधिशासी अभियंता और विद्युत सुरक्षा विभाग को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। (संवाद)
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शादी का रिश्ता टूटा, मां की भी बिगड़ी तबीयत
धीरज की शादी 27 नवंबर को तय थी। घर में तैयारी चल रही थी, लेकिन हादसे के बाद रिश्ता टूट गया। मां फूलकुमारी की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। छोटे भाई नीरज और करण का कहना है कि भाई की कमाई से ही घर चलता था, अब पूरा परिवार कर्ज में डूब गया है। परिजनों के अनुसार, हादसे के बाद अवर अभियंता और एसडीओ ने इलाज का पूरा खर्च उठाने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में मुकर गए। अब तक करीब चार लाख रुपये इलाज पर खर्च हो चुके हैं, जबकि विभाग की ओर से केवल 1.6 लाख रुपये दिए गए हैं।
Iसंविदाकर्मी बिना उपकेंद्र पर सूचना दिए पोल पर चढ़कर काम करने लगा था। इस दौरान करंट लगने से जमीन पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। उनके परिजनों से बातचीत कर मदद करने का आश्वासन दिया है।I
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Iविशाल वर्मा, अधिशासी अभियंताI
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