लखनऊ। ओडिसी और मणिपुरी नृत्य शैलियों के संगम से सजी नृत्य नाटिका ‘श्रीकृष्ण की वारी’ ने शनिवार शाम भारतेंदु नाट्य अकादमी में दर्शकों को अपने मोहपाश में बांधे रखा। स्वर्ण जयंती समारोह के सातवें दिन राज बिसारिया प्रेक्षागृह में आयोजित नृत्य नाटिका की प्रस्तुति में भक्ति, प्रेम और दिव्य लीला की आध्यात्मिक यात्रा दिखाई दी। यह प्रस्तुति रवींद्रनाथ टैगोर की ''भानु सिंह की पदावली'' की काव्यात्मक सुंदरता पर आधारित रही। राहुल मुखर्जी के निर्देशन में सजी इस नृत्य नाटिका में राधा-कृष्ण के शाश्वत प्रेम लोक को जीवंत किया गया है।
यह नृत्य नाटिका विद्यापति, चंडीदास और जयदेव की भक्ति परंपरा से प्रेरित रही। विशेष रूप से, गीत गोविंद से प्रेरणा लेकर यह प्रस्तुति भक्ति, श्रंगार और रस की लय में प्रवाहित होती है। यह श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं को सजीव करती है, जिसमें मधुरता की चंचलता और राधा का विरह प्रमुखता से दर्शाया गया है। प्रस्तुति आत्मा का परमात्मा से मिलन की अभिलाषा को भी व्यक्त करती है। नाटिका में ओडिसी और मणिपुरी नृत्य शैलियों का अनूठा संगम देखने को मिला। इस नाटिका में राधा की भूमिका रूपाली बागची ने और कृष्ण की भूमिका स्वयं राहुल मुखर्जी ने निभाई। (माई सिटी रिपोर्टर)
मंच पर उतरा राधा-कृष्ण का शाश्वत प्रेम
मंच पर उतरा राधा-कृष्ण का शाश्वत प्रेम
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मंच पर उतरा राधा-कृष्ण का शाश्वत प्रेम
मंच पर उतरा राधा-कृष्ण का शाश्वत प्रेम
मंच पर उतरा राधा-कृष्ण का शाश्वत प्रेम
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मंच पर उतरा राधा-कृष्ण का शाश्वत प्रेम
मंच पर उतरा राधा-कृष्ण का शाश्वत प्रेम
मंच पर उतरा राधा-कृष्ण का शाश्वत प्रेम
मंच पर उतरा राधा-कृष्ण का शाश्वत प्रेम