लखनऊ। टीबी व अन्य बीमारियों में दवा का विशिष्ट मरीज पर क्या असर होगा, इसकी जानकारी पहले ही हो जाएगी। इससे मरीज को केवल उस पर असर होने वाली दवाएं दी जाएंगी। इसके लिए संजय गांधी पीजीआई में बायोसेफ्टी लेवल-3 कल्चर ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग और मॉलेक्यूलर नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग ट्यूबरकुलोसिस प्रयोगशाला शुरू की गई है।
संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमन ने बताया कि प्रयोगशाला के लिए सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) पहल के तहत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड यूपी से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह प्रयोगशाला 3.5 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई है। नोडल प्रभारी डॉ. ऋचा मिश्रा ने बताया कि यह प्रयोगशाला प्रदेश में अपनी तरह की पहली लैब है।
इसमें कल्चर व स्वचालित दवा संवेदनशीलता परीक्षण की जांच हो सकेगी। लाइन जांच व एक्सडीआर सीबीएनएएटी परख के माध्यम से टीबी के खिलाफ दवाओं का परीक्षण भी हो सकेगा। इंडियन ऑपल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अतुल कपूर ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में विशेष रूप से क्षय रोग और कैंसर के उपचार में कंपनी की ओर से किए गए कामों के बारे में बताया। इस मौके पर डॉ. आलोक नाथ, डॉ. शैलेंद्र भटनागर, डॉ. अक्षय आर्य, डॉ. विक्रमजीत सिंह, डॉ. आशिमा और डॉ. दीक्षा मौजूद रहे।