लखनऊ। गोमती को प्रदूषण से बचाने के लिए अफसरों ने जिन नालों को बंद करने का दवा किया, उनमें से कई अब भी सीधे नदी में गिर रहे हैं। गोमती दर्शन संस्था ने बुधवार को जानकीपुरम में हुई एक विशेष बैठक में इस मुद्दे को फिर से उठाया और नदी में गिर रहे 33 नालों को तत्काल रोके जाने की मांग की।
संस्था की अध्यक्ष श्वेता सिंह ने कहा कि गोमती के अस्तित्व पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। नालों का गंदा पानी नदी को प्रदूषित कर रहा है, जिससे इसका पानी न तो आचमन योग्य बचा है और न ही स्पर्श योग्य। मुख्यमंत्री को दी गई जानकारी के अनुसार, गोमती में केवल 13 नाले गिर रहे हैं, जबकि हकीकत में 33 नाले सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से नदी में मिल रहे हैं, जिनमें से 29 नालों का अशोधित जल आज भी प्रवाहित हो रहा है।
डेवलपमेंट परियोजना के तहत ट्रांसगोमती साइड के 15 और सिस गोमती के 14 नालों को इंटरसेप्टिंग ट्रंक ड्रेन के माध्यम से बंद किया जाना प्रस्तावित था, लेकिन यह कार्य अब तक अधूरा है। जो नाले बंद भी किए गए हैं, वे ओवरफ्लो होकर नदी में गिर रहे हैं।
बैठक में सोनी सिंह, अधिवक्ता गौर दीक्षित, संजीव श्रीवास्तव, पंकज शुक्ला, अधिवक्ता राजेश शुक्ला, अधिवक्ता अरविंद जायसवाल, अरविंद कुमार पांडे, अमरेश पांडे, पवन मिश्रा, कौशल, अभिनय तिवारी और हरिओम दीक्षित प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।