लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय सि्थत काॅल्विन तालुकेदार कॉलेज मैदान में शुक्रवार को ''वीरांगना वाहिनी'' का दूसरा भव्य सम्मेलन हुआ। इसमें नारी शक्ति का उद्घोष गूंजा। 40 जिलों से आई हजारों युवतियों ने ''लो भारत अपने हाथ में, निकलों बंद मकानों से'' का संदेश दिया।
संस्थापिका ऊषा विश्वकर्मा ने कहा कि महिलाओं को अपने वजूद पर गर्व करना चाहिए। डर कर या किसी से दब कर नहीं रहना चाहिए। आप जितना अधिक दबते हैं लोग उतना ही दबाते हैं। जोर दिया कि महिलाओं को सुरक्षित और स्वावलंबी बनकर राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभानी होगी। वीरांगना नेहा, शलोनी, चारू, रितु, रितिका, अनु आदि ने संबोधित किया। हक मांगने से नहीं मिलता है। इसे छीनना पड़ता है। पुरुषों के बीच या दो समुदाय के बीच विवाद होने पर महिलाओं को ही निशाना बनाया जाता है। उनका ही शोषण किया जाता है। इसे खत्म करने के लिए सभी को घर से बाहर निकलकर एक साथ आना होगा तभी बदलाव आएगा। संगठन की ओर से चलाया जा रहा अभियान लैंगिक और सामाजिक समानता के माध्यम से एक समतामूलक समाज के सपने को साकार कर रहा है। वीरांगना वाहिनी देश के स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगनाओं के त्याग और बलिदान की विरासत को आगे बढ़ा रही है। संगठन से जुड़े 80 से अधिक यूनिट की युवतियों ने इसमें भाग लिया।
सम्मेलन में गूंजा नारी शक्ति का उद्घोष
सम्मेलन में गूंजा नारी शक्ति का उद्घोष
सम्मेलन में गूंजा नारी शक्ति का उद्घोष
सम्मेलन में गूंजा नारी शक्ति का उद्घोष
सम्मेलन में गूंजा नारी शक्ति का उद्घोष
सम्मेलन में गूंजा नारी शक्ति का उद्घोष
सम्मेलन में गूंजा नारी शक्ति का उद्घोष
सम्मेलन में गूंजा नारी शक्ति का उद्घोष
सम्मेलन में गूंजा नारी शक्ति का उद्घोष