लखनऊ। स्पेस साइंस के क्षेत्र में भारत तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है और दुनिया की अपेक्षाओं से भी तेज गति से आगे बढ़ रहा है। जल्द ही देश का अपना स्पेस स्टेशन भी अंतरिक्ष में स्थापित होगा। यह बात भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन व अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में आयोजित दो दिवसीय ग्रीष्मकालीन पादप विज्ञान महोत्सव के समारोह में बताैर मुख्य अतिथि कहीं।
समापन समारोह के मुख्य कार्यक्रम में डिजिटल फोटोग्राफी, मौखिक व्याख्यान और पोस्टर प्रस्तुति जैसी प्रतियोगिताएं हुईं, जिनमें करीब 200 शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। निदेशक डॉ. अजित कुमार शासनी ने कहा कि शोधार्थी संस्थान की रीढ़ होते हैं और उनका शोध देश की प्रगति में अहम भूमिका निभाता है।
शुभांशु ने बताया कि भारत का संविधान दुनिया का इकलाैता ऐसा संविधान है जो अपने नागरिकों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने को मौलिक कर्तव्य मानता है। अंतरिक्ष यात्रा के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर माइक्रोग्रेविटी में सायनोबैक्टीरिया और शैवाल पर किए गए प्रयोगों का जिक्र किया और कई रोचक घटनाएं भी सुनाईं।
शुभांशु को अंतरिक्ष में बुलाते थे ''बैले नर्तकी''
एक दिलचस्प अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि प्रयोगों के दौरान सैंपल को सिरिंज में भरते समय उसमें हवा आ जाती थी। इसे निकालने के लिए उन्हें बार-बार सेंट्रीफ्यूज मशीन तक जाना पड़ता था। लगातार चक्कर लगाने के कारण अन्य अंतरिक्ष यात्री उन्हें मजाक में ''स्पेस बैलेरिना'' यानी बैले नर्तकी नाम से पुकारने लगे थे। उन्होंने शोधार्थियों को संदेश दिया कि भारत और भारतीयों के लिए आसमान कोई सीमा नहीं है, बल्कि अब उससे भी आगे बढ़ने की अनगिनत कहानियां लिखी जाने वाली हैं।
अंतरिक्ष में बढ़ गई थी लंबाई, दिल हो गया था छोटा
शुभांशु ने शोधार्थियों से अंतरिक्ष स्टेशन पर बिताए समय का एक रोचक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में उनकी लंबाई करीब पांच सेंटीमीटर बढ़ गई थी, जिससे वे काफी खुश थे। हालांकि, पृथ्वी पर लौटने के बाद उनकी लंबाई फिर सामान्य हो गई। गुरुत्वाकर्षण के अभाव में रक्त का प्रवाह पैरों से सिर की ओर अधिक हो गया था, जिससे सिर थोड़ा बड़ा दिखने लगा और हृदय कुछ सिकुड़ गया था। इस दौरान उनका वजन भी करीब पांच किलो कम हो गया था।
सम्मानित कर्मचारियों के साथ भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, वरिष्ठ प्रधान वैज्