रेलवे की एनओसी लेने के लिए लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने कोशिशें और तेज कर दी हैं। एलएमआरसी अब रेलवे के सामने प्रस्ताव रखने जा रहा है कि उसके जो भी निर्माण अलाइनमेंट के आड़े आ रहे हैं उसके दोबारा निर्माण पर आने वाले खर्च का भुगतान कॉरपोरेशन तोड़ने से पहले ही कर देगा।
एलएमआरसी को उम्मीद है कि रेलवे उनका यह प्रस्ताव मंजूर कर लेगा। मवइया क्रॉसिंग पर मेट्रो से जुड़े निर्माण के लिए रेलवे ने अब तक एनओसी नहीं दी है। बल्कि परियोजना को लेकर जो पत्र रेलवे ने एलएमआरसी को लिखा है।
उसके मुताबिक परियोजना की रफ्तार को रेलवे की ये आपत्तियां बाधित कर सकती हैं। पत्र में कहा गया है कि, मवइया पर एलएमआरसी तब तक काम नहीं शुरू कर सकेगा।
जब तक यहां रास्ते में आ रही आरपीएफ के स्टाफ क्वार्टर और टीपीपी हॉस्टल का निर्माण नहीं किया जाएगा। इसमें कम से कम छह महीने लगेंगे।
रेलवे की ओर से एक और आपत्ति लगाई गई है, जिसके मुताबिक, मवइया क्रॉसिंग के पास एक पिलर भी रेलवे के मानकों के अनुरूप नहीं है। इसलिए उसकी भी अनुमति नहीं दी जा सकती है।
रेलवे की जिस भूमि का इस्तेमाल अस्थाई रूप से एलएमआरसी करेगा, उसके लिए भी धन एलएमआरसी को देना पड़ेगा। ऐसे में रेलवे की ये तीन आपत्तियां लखनऊ के मेट्रो रेल परियोजना पर भारी पड़ने की आशंका है।
इस आशय का पत्र उत्तर रेलवे के वरिष्ठ मंडल अभियंता (समन्वय) अनिल कालरा की ओर से एलएमआरसी को 27 अक्तूबर को लिखा गया था। सरकार की इस अति महत्वाकांक्षी परियोजना से जुड़े अधिकारियों के होश उड़े हुए हैं।
एलएमआरसी के एमडी कुमार केशव ने बताया कि, कोशिशें जारी हैं। रेलवे की ओर से जो पत्र भेजा गया है, वह एक सामान्य प्रक्रिया है। इसमें हम कोशिश भी कर रहे हैं।
एक पिलर जो कि, अलाइनमेंट के बीच आ रहा है, उसको थोड़ा शिफ्ट कर सकते हैं। जहां तक सवाल रेलवे के ध्वस्त किए जाने वाले निर्माणों को दोबारा तैयार करने की बात है तो ध्वस्तीकरण से पहले इस पर होने वाला खर्च दे देंगे।