लखनऊ। राजधानी की पोस्टमार्टम व्यवस्था को अधिक सुगम, पारदर्शी और विवाद रहित बनाने के लिए प्रशासन ने एक बड़ी कार्ययोजना तैयार की है। नई व्यवस्था के तहत अब पूरे शहर को थानाक्षेत्रों के आधार पर तीन भौगोलिक जोन में विभाजित किया जाएगा। अब तक केजीएमयू पर केंद्रित रहने वाली इस व्यवस्था का विस्तार लोहिया संस्थान और पीजीआई तक किया जा रहा है।
वर्तमान में लखनऊ की पूरी पोस्टमार्टम व्यवस्था केजीएमयू के मॉर्च्युरी हाउस पर टिकी है, जहां प्रतिदिन औसतन 25 से अधिक शवों का पोस्टमार्टम होता है। कार्य के इस भारी दबाव को कम करने के लिए मंगलवार को केजीएमयू, लोहिया और पीजीआई के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में लोहिया संस्थान ने इसी माह के भीतर पोस्टमार्टम प्रक्रिया शुरू करने का भरोसा दिलाया है।
वहीं, पीजीआई की स्थिति फिलहाल चुनौतीपूर्ण है। संस्थान में अभी केवल एक फॉरेंसिक एक्सपर्ट है, जिससे वहां तत्काल सेवाएं शुरू करना मुश्किल दिख रहा है। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए प्रांतीय चिकित्सा सेवा (पीएमएस) संघ के डॉक्टर सपोर्ट स्टाफ के रूप में विशेषज्ञों का सहयोग करेंगे।
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक जोन के शव संबंधित आवंटित संस्थान में ही भेजे जाएंगे। सीएमओ के अनुसार, यह विभाजन न केवल प्रक्रिया में तेजी लाएगा, बल्कि रिपोर्ट की गुणवत्ता और सटीकता भी सुनिश्चित करेगा। सभी पोस्टमार्टम फॉरेंसिक विशेषज्ञों की सीधी निगरानी में होंगे, जिससे किसी भी प्रकार के विवाद की गुंजाइश नहीं रहेगी।