लखनऊ। निमोनिया से ग्रस्त मासूम छह घंटे तक लोकबंधु अस्पताल में भर्ती रहा था। हालत नाजुक होने पर उसे ऑक्सीजन सपोर्ट पर एंबुलेंस के जरिये केजीएमयू रेफर किया गया था। शुक्रवार को अस्पताल प्रशासन ने भर्ती का रिकाॅर्ड व सीसीटीवी फुटेज खंगाला तो सच सामने आया। अस्पताल प्रशासन ने परिजनों के इलाज न मिलने के आरोप को बेबुनियाद बताया है।
अमौसी एयरपोर्ट के पास रहने वाले शिवा का बेटा कान्हा (11 माह) को निमोनिया की शिकायत थी। परिजन पहले नजदीकी निजी अस्पताल से दवा ले रहे थे, मगर उसकी सेहत में खास सुधार नहीं हुआ। बृहस्पतिवार सुबह छह बजे बच्चे को सांस लेने में तकलीफ होने पर परिजन लोकबंधु अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने उसे इमरजेंसी में भर्ती कर इलाज शुरू किया। करीब छह घंटे तक बच्चा लोकबंधु अस्पताल में भर्ती रहा। हालत नाजुक होने पर उसे केजीएमयू रेफर किया गया था। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पिता ने लोकबंधु अस्पताल पर भर्ती के बजाय रेफर करने का आरोप लगाया था। लोकबंधु अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय शंकर ने बताया कि बच्चे को पूरा इलाज मुहैया कराया गया। शुक्रवार को सीसीटीवी व भर्ती के रिकाॅर्ड की जांच में इसका खुलासा हुआ है। इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई।