लखनऊ। भारतेंदु नाट्य अकादमी के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आठ दिवसीय स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह का रविवार को समापन हो गया। अंतिम दिन ‘दूतवाक्यम’ और ‘अब न बनेगी देहरी’ नाटकों का मंचन किया गया। समापन अवसर पर बीएनए के विद्यार्थियों ने बाहर सजे मंच पर लोकगीतों पर नृत्य की प्रस्तुति से दिल जीत लिया।
पहले नाटक के रूप में दूतवाक्यम् की प्रस्तुति हुई जिसका निर्देशन किया डॉ. दिव्या श्रीवास्तव ने। महाकवि भास के नाटक को भरतनाट्यम और छाऊ शैली में गौरी कला मंडप की ओर से प्रस्तुत किया गया। यह नाटक महाभारत के उस निर्णायक क्षण को प्रस्तुत करता है जब भगवान श्रीकृष्ण शांति दूत बनकर हस्तिनापुर की सभा में आते हैं। वे कौरवों को पांडवों के साथ न्याय करने और युद्ध टालने का संदेश देते हैं। लेकिन अहंकार से भरा दुर्योधन इस प्रस्ताव को ठुकरा देता है। राजा धृतराष्ट्र सब कुछ जानते हुए भी निर्णय लेने में असमर्थ रहते हैं। अंततः यह संवाद असफल होता है और महाभारत युद्ध की भूमिका तैयार होती है। नाटक में धर्म, नीति, अहंकार और कर्तव्य के गहन संघर्ष को दिखाया गया। नाटक में आयुष साहू, अमित सिंह, बृजमोहन, ऋत्विक सिंह, अमृत मिश्रा आदि ने प्रमुख भूमिकाएं निभाईं।
मंच पर उतरी पद्मा सचदेव की कहानी ‘अब न बनेगी देहरी’
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बीएनए के निदेशक बिपिन कुमार के निर्देशन में राज बिसारिया प्रेक्षागृह में नाटक ‘अब न बनेगी देहरी’ का मंचन अंतिम प्रस्तुति के रूप में किया गया। एक घंटा 40 मिनट का यह नाटक डोगरी भाषा की प्रसिद्ध लेखिका पद्मा सचदेव के लिए हिंदी उपन्यास अब न बनेगी देहरी का नाट्य रूपांतरण है। कहानी एक युवा विधवा रेवती के इर्द-गिर्द घूमती है। पति की असामयिक मृत्यु के बाद विषम परिस्थितियों के बीच घिरी रेवती मंदिर की बावड़ी में आत्महत्या करने की कोशिश करती है लेकिन शिव मंदिर के युवा महंत गिरीबाबा उसे बचा लेते हैं। महंत रेवती की परिस्थिति का पता चलने पर संपूर्ण नारी समाज के लिए अपनी सहानुभूति प्रकट करते हैं। धीरे-धीरे मठ के नियमों से बंधे महंत और विषम परिस्थितियों से घिरी रेवती के बीच आध्यात्मिक प्रेम पनपता है। गिरीबाबा ब्रह्मचारी हैं, जो समाज में बने अपने वर्चस्व को बचाने के लिए प्रेम का त्याग कर जीवित समाधि लेने को तैयार हो जाते हैं। रेवती इन सारे बंधनों से मुक्त होकर अपने जीवन की नई यात्रा पर निकल जाती है। नाटक में चैतन्य महाप्रभु त्रिपाठी, धीरज कुमार, आशुतोष जायसवाल, श्रुतिकीर्ति सिंह, तिला रूपा सापकोटा आदि ने प्रमुख भूमिका निभाई।
मंचन करते कलाकार।
मंचन करते कलाकार।
मंचन करते कलाकार।
मंचन करते कलाकार।
मंचन करते कलाकार।