नगराम। गेहूं की बोआई शुरू होने के 20-22 दिन बाद अब सिंचाई के लिए पानी की जरूरत के समय नहर सूखी पड़ी है। जरूरत के समय पानी न मिलने से पैदावार प्रभावित होने की आशंका से किसान चिंतित हैं। उनका आरोप है कि सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अभियंताओं ने सिल्ट सफाई के बाद 10 दिसंबर तक पानी पहुंचाने का आश्वासन दिया था, लेकिन सिल्ट सफाई का काम पूरा हुए एक सप्ताह बीत चुका है फिर भी नहर में जल्द पानी आने की उम्मीद नहीं है।
शारदा सहायक पोषक नहर (इंदिरा नहर) से इलाके की हैदरगढ़ नहर शाखा प्रणाली से जौखंडी, बघौली, हरदोईया, पैकौली रसूलपुर की अल्पिकाओं व रजबाहों के जरिये सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होता है। निशुल्क होने की वजह से ज्यादातर किसान नहर के पानी पर निर्भर हैं। अमेठियन पुरवा निवासी किसान मुन्नू सिंह, बजगहिया के केशव गिरि जौखंडी के तेज बहादुर सिंह, मकदूमनगर के राजेश कुमार वर्मा, वीरेंद्र प्रताप, विनोद कुमार, जमालापुर के पूर्व प्रधान कैलाश चंद्र, मुकुंद खेड़ा के मलखान सिंह ने बताया कि 15 से 30 नवंबर तक गेहूं की बोआई का काम पूरा हो चुका है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बोआई के 20-25 दिन पर कल्ले निकलने की अवस्था पर पहली सिंचाई आवश्यक होती है। नहर में पानी आने में देरी होगी तो उत्पादन प्रभावित होने की आशंका हैं।
इस बाबत शारदा सहायक खंड 28 हैदरगढ़ ब्रांच के अवर अभियंता आरएन श्रीवास्तव ने बताया कि शारदा सहायक पोषक (नहर इंदिरा नहर) लखीमपुर खीरी हेड से बंद कर दी गई थी। अभी कुछ अल्पिकाओं में पुलिया का निर्माण हो रहा है, इसलिए पूरी क्षमता से पानी नहीं छोड़ा जा सका है। अगले सप्ताह 15 से 17 दिसंबर तक सभी अल्पिकाओं में पानी उपलब्ध हो सकेगा।