लखनऊ। कथक सम्राट पं. बिरजू महाराज की याद में मंगलवार को संगीत नाटक अकादमी का सभागार घुंघरुओं की थाप गूंज उठा। कथक गुरु की जयंती पर उनकी शिष्याओं ने कथक की विभिन्न प्रस्तुतियों से अपने गुरु को नमन किया।
बिरजू महाराज कथक संस्थान की ओर से गोमतीनगर स्थित संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे जी महाराज प्रेक्षागृह में आयोजित नृत्य प्रस्तुति की शुरुआत बिरजू महाराज की शिष्या डॉ. दीपांविता सिंघा रॉय ने निर्वाण अष्टकम से की। उन्होंने अपनी एकल कथक नृत्य के जरिए पारंपरिक नृत्य तीन ताल की प्रस्तुति दी। इसके बाद उन्होंने अपने नृत्य और भाव भंगिमाओं के जरिए मंच पर गंगा अवतरण की अनुभूति कराई। ठुमरी से भी दर्शकों को परिचित कराया।
उनके साथ सहयोगी सारंगी पर जीशान अब्बास, सितार पर नीरज मिश्रा, तबला पर उदय शंकर मिश्र, पढंत में रूद्रशंकर मिश्र और गायन एवं हारमोनियम पर नम्रता गुप्ता ने संगत की। कथक दूसरी प्रस्तुति में कथक गुरु मालती श्याम के निर्देशन में कथक केंद्र नई दिल्ली के कलाकारों ने सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। वसंत ऋतु पर आधारित गीत सब भांति सुहाई ऋतु वसंत... पर डोलमा गुप्ता, पल्लवी जैन, लक्ष्मण साहू, श्रेष्ठा जखमोला, हर्षिता द्विवेदी, बादल बैरिहा, ईपशिता गांगुली, सोनाली सैलानी, सिमरन पासपोला, तरुषि रजोरा, ऋचा बलूनी, प्रज्ञा गोस्वमी ने सामूहिक कथक की प्रस्तुति दी।
उनके साथ तबला पर योगेश गंगानी, सारंगी पर नासिर खान, पखावज पर हर्षद लाल, गायन एवं हार्मोनियम पर समी उल्लाह खान, बांसुरी पर सिद्धार्थ डलबेहरा और सितार पर मेहराब हुसैन ने संगत की। इससे पहले पं. बिरजू महाराज जयंती समारोह की शुरुआत संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, बिरजू महाराज कथक संस्थान की अध्यक्ष डाॅ. कुमकुम धर, निदेशक रविंद्र कुमार, सहायक निदेशक तुहिन द्विवेदी, प्रमुख सचिव संस्कृति विभाग मुकेश मेश्राम ने दीप प्रज्जवलित कर किया। संचालन अदिति थपलियाल ने किया।