लखनऊ। नारी मन की संवेदनशीलता जब अक्षरों में ढलती है तो पढ़ने वाले द्रवित हो जाते हैं। यही अक्षर जब कहानी के किरदारों के रूप में रंगमंच पर उतरते हैं तो देखने वालों की आंखें नम हो जाती हैं। ऐसा ही कुछ देखने को मिला रविवार को एसएनए के संत गाडगे प्रेक्षागृह में जहां मंचकृति के नाट्य उत्सव की 17 दिवसीय शृंखला के तहत सातवें दिन तीन कहानियों का मंचन किया गया। निर्देशन संगम बहुगुणा और विकास श्रीवास्तव का रहा।
भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे चुकीं सर्जन और लेखिका डॉ. रुचि श्रीवास्तव की कहानी दोष में एक छह साल की बच्ची बबुई अपने चाचा के विवाह में शामिल होने परिवार के साथ छोटी दादी के घर आती है। बरात से लौटने के बाद उसे नई चाची का ध्यान रखने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। नई चाची के मायके चले जाने के बाद वह परिवार के साथ पिकनिक जाती है। वहां खंडहरनुमा एक बंगले में वह भी बड़े भाइयों के साथ खेलने चली जाती है। लौटकर घर आने पर उसे गलती और दोष का पता चलता है। नाटक में डॉ. अनामिका श्रीवास्तव, उन्नति श्रीवास्तव, मिन्नी दीक्षित, अर्चना शुक्ला और ज्योति सिंह ने अहम भूमिका निभाई।इस दौरान नेतागिरी और धर्म की दीवार नाटक का भी मंचन हुआ।