विनीत चतुर्वेदी
लखनऊ। शनिवार को दोपहर के 1 बजे हैं। हम लालबाग पहुंचते हैं। यह इलाका पिछले कई दिनों से हवा की बिगड़ी सेहत की वजह से सुर्खियों में है। चर्चा इसलिए भी कि यहां की हवा खराब होने के मामले में औद्योगिक इलाकों से होड़ ले रही है। सुबह से सड़क किनारे खड़ी स्थानीय दुकानदारों व व्यवसायियों की कारों के शीशे पर जमी हुई धूल की मोटी परत यहां के हालात को खुद-ब-खुद बयां कर देती है।
हमने लोगों से लालबाग की बिगड़ी हवा की वजहों पर चर्चा की और जानना चाहा कि ऐसे हालात क्यों पैदा हुए। दयानिधान पार्क में लगे वायु प्रदूषण मापक स्टेशन के इर्द-गिर्द जायजा लिया। हमने सवाल उछाला ही था कि स्थानीय निवासी अमित मोहन ने नॉनवेज के रेस्त्रां व फास्टफूड की स्टॉल की तरफ इशारा करते हुए तपाक से कहा- आप ही देख लीजिए कि कितना धुआं उठ रहा है। यह पूरा इलाका घनी बसावट वाला है। ये तंदूर और भट्ठियां देर रात तक धुआं उगलती रहती हैं। मेरा तो मानना है कि खराब हो रही हवा की सबसे बड़ी वजह यही हैं।
दोपहिया वाहनों के रवां होते रहते हैं इंजन
तंदूर-भट्ठियाें के अलावा प्रदूषण की क्या वजहें हो सकती हैं? दयानिधान पार्क के पास रहने वाले असलम से हमने ये सवाल किया। वह कहते हैं, जूते वाली गली और आसपास दोपहिया वाहनों की रिपेयरिंग की कतार से दुकानें खुल गई हैं। खराब इंजन को दुरुस्त कर उनको रवां करते हैं। घंटों बाइक एक ही पोजिशन पर धुआं उगलती रहती है। आसपास के इलाकों में लोग कूड़ा भी जला देते हैं। बिजली के तार से मेटल निकालने का काम भी कई जगह होता है। तार निकालने के लिए प्लास्टिक को जलाते हैं। ऐसे में प्रदूषण तो फैलेगा ही।
प्रदूषण मापक स्टेशन के आसपास पानी का छिड़काव क्यों ?
प्रदूषण की चर्चा छिड़ते ही स्थानीय निवासी जमाल अहमद सवाल उछाल देते हैं, वायु प्रदूषण मापक स्टेशन के आधा किमी के दायरे में ही पानी का छिड़काव क्यों कराया जाता है? इसी दायरे में सफाई क्यों कराई जाती है? दयानिधान पार्क में लगे वायु प्रदूषण मापक स्टेशन को चारों तरफ से ग्रीन नेट से ढक दिया गया है। इस सबके पीछे मंशा यही है कि एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) बेहतर दिखे।
एक्सपर्ट कमेंट : सिगरेट से भी ज्यादा घातक है गर्म तेल का धुआं
- डॉ. सुमित श्रीवास्तव, वैज्ञानिक, उप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद
यूरोप में हुए एक शोध में पाया गया कि अधजले कुकिंग ऑयल के धुएं में 200 से ज्यादा तरह की गैसें होती हैं, जो हवा में मिलकर सेहत को नुकसान पहुंचाती हैं। इससे गंभीर बीमारियां हो सकती हैं,
कुकिंग ऑयल को लगातार गर्म करने से रासायनिक अभिक्रियाएं होती हैं जिससे हाइड्रोपैराक्साइड, एल्डिहाइड जैसे केमिकल बनते हैं। ये केमिकल तेल को तो जहरीला बनाते ही हैं, फैटी एसिड वाला प्रदूषित धुआं अस्थमा, न्यूमोनिया, राइनाइटिस के साथ ही लंग कैंसर, फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
यूपीपीसीबी ने कहा-लालबाग में जांच करेगी टीम
-लालबाग के स्थानीय लोगों ने प्रदूषण के लिए जिन वजहों को जिम्मेदार बताया उसको लेकर हमने उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी जेपी मौर्या से सवाल किए। लालबाग के इलाके में बढ़ रहे तंदूर व भट्ठियों और इसके दुष्प्रभाव के सवाल पर उन्होंने कहा कि जांच के लिए हमारी टीम दौरा करेगी।
- वायु प्रदूषण मापक यंत्र को ग्रीन नेट से ढकने के सवाल पर उन्होंने कहा कि दयानिधान पार्क में लगे वायु प्रदूषण मापक स्टेशन के इर्द-गिर्द कूड़ा जला देने से रीडिंग सटीक नहीं आती। रीडिंग सही और सटीक आए इसके लिए हमने आसपास ग्रीन नेट लगवाया है।
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