लखनऊ। हुसैनाबाद ट्रस्ट क्षेत्र में प्रस्तावित पार्किंग व्यवस्था को लेकर प्रशासन और शिया समुदाय के बीच उपजे विवाद को लेकर सोमवार शाम प्रशासन की ओर से ट्रस्ट के सचिव एवं एडीएम (पूर्वी) महेंद्र पाल सिंह ने शिया धर्मगुरुओं के साथ बैठक की। बैठक शिया धर्मगुरु एवं इमामे जुमा आसिफी मस्जिद मौलाना कल्बे जवाद के आवास पर हुई।
इस दौरान मौलाना कल्बे जवाद ने प्रस्तावित विकास कार्यों को लेकर अपनी आपत्तियां और चिंताएं प्रशासन के सामने रखीं। उनका कहना था कि वर्ष 2014 में हुसैनाबाद ट्रस्ट के विकास कार्यों को लेकर कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया था, ताकि क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए विकास योजनाएं तैयार की जा सकें। उनका आरोप रहा कि अब तक उस निर्णय का पूरी तरह पालन नहीं किया गया है। प्रशासनिक अधिकारी शिया समुदाय के लोगों से वार्ता व रायशुमारी किए बगैर काम कर रहे हैं, जिससे शिया समुदाय के लोगों में रोष है।
शिया धर्मगुरुओं ने संबंधित स्थल के धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की। उनका कहना था कि हुसैनाबाद केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि शिया समुदाय की आस्था और पुराने लखनऊ की तहजीब का अहम हिस्सा है। यहां मुहर्रम सहित कई धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं, इसलिए किसी भी निर्माण कार्य से पहले समुदाय की राय लेना जरूरी है।
वहीं, ट्रस्ट के सचिव महेंद्र पाल सिंह ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य क्षेत्र की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना है। उन्होंने बताया कि पुराने लखनऊ में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और पार्किंग समस्या को देखते हुए व्यवस्थाएं विकसित करने की योजना बनाई जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों को सुविधा मिल सके।
बैठक के दौरान प्रशासन की ओर से यह आश्वासन भी दिया गया कि भविष्य में जो भी विकास कार्य किए जाएंगे, उनमें शिया समुदाय और स्थानीय लोगों की राय और भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। सूत्र बताते हैं कि इस बैठक के बाद मामले में बातचीत के जरिये समाधान निकलने की उम्मीद बढ़ी है। इस मौके पर शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जवाद, मरकजी चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी, सैफ अख्तर, कल्बे अहमद आदि मौजूद रहे।
-