गोमती नदी और छतर मंजिल के बीच मौजूद और रूमी गेट तक जाने वाली ऐतिहासिक ठंडी सड़क के दिन बहुरने वाले हैं।
इस सड़क को ऐतिहासिक लुक देने के लिए फ्रांसीसी आर्किटेक्ट की मदद लेने की कवायद चल रही है। रूमी गेट सड़क के किनारे हरियाली होगी और पर्यटकों के लिए पैदल चलने की सुविधा होगी।
मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार संस्कृति निदेशालय इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है। संस्कृति निदेशालय के सूत्रों ने बताया कि रिवर फ्रंट डेवलेपमेंट के तहत सड़क का पुनर्निर्माण कराने की तैयारियां हैं।
मुख्यमंत्री ने छतर मंजिल और सड़क को डेवलप करने के लिए करीब 50 लाख रुपये देने की बात कही थी। देखरेख के अभाव में यह सड़क गंदगी से पट गई है।
कभी संगीतकारों, कलाकारों का लगता था जमावड़ा
इतिहासकार बताते हैं कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से पूर्व नवाबों के ख्वाबगाह छतर मंजिल को पुराने शहर से ठंडी सड़क ही जोड़ती थी।
सड़क के पास नदी किनारे नावें होती थीं। इनसे नवाब सफर करते थे। उस वक्त कमिश्नर ऑफिस के सामने वाली रोड नहीं थी। नदी किनारे होने के कारण आसपास का क्षेत्र ठंडा रहता था।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सड़क को ध्वस्त कर दिया। आजादी के बाद छतर मंजिल सीडीआरआई को मिल गई। कमिश्नर दफ्तर केसामने सड़क बन गई और ठंडी सड़क इतिहास केपन्नों में दफन हो गई।