आतंकी संगठन आईएसआईएस के चार संदिग्ध आतंकियों का 10 दिन का पुलिस कस्टडी रिमांड एटीएस को मिला है। एटीएस ने गौस मोहम्मद खान, अजहर, शैलेंद्र और फखरे आलम का 10 दिन का रिमांड एटीएस की विशेष अदालत से मांगा था।
एक दिन पहले एटीएस की विशेष अदालत ने मोहम्मद फैसल खान को भी 10 दिन के पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेजा था। आईजी एसटीएफ रामकुमार ने बताया कि एटीएस की टीम पांचों संदिग्ध आतंकियों से पूछताछ कर संगठन के बारे में जानकारी हासिल करेगी।
सूत्रों की मानें तो गौस मोहम्मद खान पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए भी काम कर चुका है, एटीएस इसकी भी तफ्तीश कर रही है।
कई घंटों तक सुनी थी संदिग्धों की बातचीत
सूत्रों का कहना है कि चार मार्च को गौस मोहम्मद खान के बारे में एटीएस को जानकारी मिली थी। जिस अधिकारी ने यह जानकारी यूपी पुलिस से साझा की थी, उसने कई घंटे तक इन संदिग्धों की बातचीत सुनी थी। उसी के बाद सूचना यूपी एटीएस को दी गई।
जो युवक ट्रेन में ब्लास्ट करने मध्य प्रदेश गए, वे तेलंगाना एटीएस के रडार पर थे। वहीं फखरे आलम, अजहर और शैलेंद्र से असलहों के बारे में जानकारी ली जाएगी कि वे असलहे कहां से लाते थे, इन लोगों को ये असलहे कौन सप्लाई करता था?
‘अंकल’ के मंसूबे आएंगे सामने
पूछताछ के दौरान यह भी सामने आएगा कि आखिर गौस मोहम्मद उर्फ अंकल के मंसूबे क्या थे? उसके निशाने पर कौन-कौन सी जगह थी और उसने यह संगठन किस तरह खड़ा किया। यह भी पता करने की कोशिश की जाएगी कि अंकल किससे प्रभावित हुआ था। क्या किसी ने अंकल को यूपी में इस तरह का ग्रुप खड़ा करने का जिम्मा दिया था?
किस तरह युवाओं को इस संगठन से जोड़ने केलिए प्रेरित करता था। एटीएस की टीम गौस मोहम्मद को लखनऊ में रस्तोगीनगर, बालागंज के उस घर भी लेकर जाएगी जहां वह किराए पर रह रहा था। गौस मोहम्मद मूल रूप से रायबरेली का रहने वाला है।
मध्य प्रदेश में पकड़े गए संदिग्धों से भी कराएंगे आमना-सामना
एडीजी कानून-व्यवस्था दलजीत सिंह चौधरी ने बताया कि लखनऊ, कानपुर और इटावा से पकड़े गए संदिग्धों का सामना मध्यप्रदेश में पकड़े गए आईएसआईएस के तीन संदिग्धों दानिश अख्तर, आतिफ मुजफ्फर और सैयद मीर हुसैन से कराया जाएगा, ताकि कड़ी से कड़ी जोड़ी जा सके।
मध्यप्रदेश में गिरफ्तार तीनों संदिग्ध को यूपी लाने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके लिए एटीएस के एक अपर पुलिस अधीक्षक मध्य प्रदेश के लिए रवाना हो चुके हैं।
एनआईए को अभी तक ट्रांसफर नहीं हुआ केस
जल्द ही इस पूरे मामले को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के सुपुर्द किया जाएगा। एडीजी ने बताया कि यूपी पुलिस की ओर से गृह मंत्रालय को इस बारे में निर्धारित प्रोफॉर्मा भेजा गया है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह लोकसभा में पहले ही इस केस को एनआईए को स्थानांतरित किए जाने के बारे में कह चुके हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि यह मात्र एक औपचारिकता भर है।
दलजीत सिंह चौधरी का कहना है कि एटीएस अपना काम जारी रखेगी। जैसे ही केस ट्रांसफर होगा, उस समय जिस स्टेज में जांच होगी, उसी स्टेज में सब कुछ एनआईए को सौंप दिया जाएगा।