लश्कर आतंकी इरफान सुरक्षा एजेंसियों की आंखों में धूल झोंक कर एक-दो नहीं बल्कि पूरे 15 साल तक फरार रहा। इस दौरान वह नेपाल में इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) का चीफ बन गया।
वहां से वह जेहाद के नाम पर भारतीय मूल के युवकों को गुमराह करने का काम करने लगा और पकड़े जाने तक युवकों को आतंकी प्रशिक्षण के लिए आईएसआई एजेंटों को सौंपता रहा।इस दौरान वह आईएसआई एजेंटों के सीधे संपर्क में रहा। इरफान को नेपाल में आईएम का चीफ कोलकाता निवासी आसिफ रजा खान ने बनाया था। वर्ष 1996 में दोनों आतंकी तिहाड़ जेल में बंद था।
आसिफ का तिहाड़ जेल में पहले बंद मुश्ताक अहमद जरगर से नजदीकी रिश्ता था। जरगर वही आतंकी है, जिसे भारत सरकार ने कंधार में एयर इंडिया विमान के बंधकों को मुक्त कराने के लिए हुए सौदे में रिहा कर दिया था।
इस तरह जेल से बाहर निकला था इरफान
आसिफ ने जरगर के साथ मिलकर भारत में आतंकियों के नए संगठन इंडियन मुजाहिदीन की रूपरेखा तैयार की थी। उसी समय इरफान से बात की, तो उसने भी अपनी प्रतिबद्धता जता दी। उसी दौरान आसिफ को 1993 में हुए धमाके के मुकदमे की सुनवाई के लिए अजमेर जेल भेजा जा रहा था, जिसमें आसिफ के जेल से जल्द रिहा होने के आसार बन हुए थे।
तब आसिफ ने इरफान से कहा था कि वह भी किसी तरह जेल से बाहर आ जाए और कोलकाता आकर मिले। इरफान 19 जून 2001 को अपने भाई की शादी में शामिल होने के बहाने से चार दिन का पैरोल हासिल करने में कामयाब हो गया।
पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद इरफान न तो वापस जेल पहुंचा और न ही समर्पण किया। पुलिस और अन्य एजेंसियों उसे ढूंढते रही, पर वह नहीं मिला। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी के अफसरों की मानें तो वह सीधे कोलकाता पहुंचा और आसिफ से मिला।
इब्राहिम के नाम से नेपाल में रह रहा था इरफान
नेपाल में स्थायी ठिकाना बनाने के लिए इरफान को दस्तावेज की जरूरत थी। आमिर ने उसे फर्जी दस्तावेज मुहैया कराए, जिनके आधार पर वह मो. इब्राहिम के नाम से वहां रहने लगा।
कुछ महीने के बाद उसने पत्नी और बच्चों को भी काठमांडू बुला लिया। सभी फर्जी दस्तावेज के आधार पर रह रहे हैं।
इरफान ने पूछताछ में बताया कि आमिर कराची से हर महीने इरफान व उसके परिवार को खर्च के लिए पैसे भेजता है। पैसा वेस्टर्न यूनियन या प्रभु मनी ट्रांसफर के जरिये भेजा जाता है।
यही नहीं आमिर समय-समय पर इरफान को संगठन पर खर्च करने के लिए पैसे देते रहता था।
पूर्वांचल से बुंदेलखंड तक फैले हैं लश्कर के माड्यूल
इरफान से अभी तक की पूछताछ में जो जानकारी मिली है, उससे सुरक्षा एजेंसियां चौकन्नी हो गई है। सूत्रों के मुताबिक इरफान ने बताया है कि इलाहाबाद और वाराणसी से लेकर बुंदेलखंड तक लश्कर व आईएम के कई माड्यूल काम कर रहे हैं।
इरफान ने कुछ ऐसे माड्यूल की जानकारी भी दी है, जिसकी पड़ताल की जा रही है। आसिफ ने कोलकाता में इरफान को अपने भाई आमिर रजा खान से मिलवाया।
आमिर उस वक्त आईएम का संयुक्त चीफ था। आमिर आईएम के लिए रियाज व इकबाल भटकल के साथ मिलकर काम कर रहा था।
इसी मुलाकात में इरफान को नेपाल का आईएम चीफ बनाने का फैसला हुआ। जब आईएम के लिए धन की जरूरत महसूस हुई तो इरफान और आमिर ने मिलकर खादिम जूतों के मालिक पार्थो रॉय बर्मन को अगवा कर लिया था।
बाद में इरफान को काठमांडू भेज दिया गया था, जहां वह नेपाल में आईएम का चीफ बन गया। वहां इरफान ने जैकेट बनाकर बेचने का धंधा शुरू किया।
साथ ही वहां एक साइबर कैफे खोला, जिसका इस्तेमाल आईएम के लिए करता था। जब आमिर पाकिस्तान से जब आतंकियों को काठमांडू भेजता था तो इरफान ही उन्हें जरूरी मदद और अन्य संसाधन मुहैया कराता था।