कितनी भी करेंसी हो एक्सचेंज होगी
सिद्धार्थनगर से लगती सीमा पर तो हमें ब्रिटेन के पाउंड स्टर्लिंग, अमेरिकी डॉलर, संयुक्त अरब अमीरात के दिरहम, दक्षिण कोरियाई वॉन व चीनी युआन करेंसी के भी एक्सचेंज की सुविधा मिली। बॉर्डर पर मिले आबिद ने दावा किया कि कितनी भी करेंसी हो एक्सचेंज होगी। बस कुछ समय लगेगा। यहां से हम महराजगंज जिले में पहुंचे।
सोनौली कोतवाली से ठीक पहले खुलेआम मनी एक्सचेंज की दुकान सजी है। नौतनवा में डॉलर व दिरहम के एक्सचेंज की बात हुई। कमीशन पर सौदा नहीं पटा तो हम तीसरे बड़े केंद्र ठूठीबारी पहुंच गए। निचलौल रोड से कोतवाली गेट से पहले तक भारतीय रुपये को नेपाली और नेपाली को भारतीय में बदलने की सुविधा मिली, लेकिन दिरहम और डॉलर के लिए कोई तैयार नहीं हुआ।
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इस बीच पान के एक दुकानदार ने गुड्डू के बारे में बताया, जो हर करेंसी बदलने को राजी हो गया। पूर्व आईबी अधिकारी संतोष सिंह बताते हैं कि नेपाल से लगते भारतीय क्षेत्रों में अवैध मनी एक्सचेंज देश की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है।
नेपाल को एफएटीएफ ने ग्रे सूची में डाला
मनी एक्सचेंज का सीधा जुड़ाव मनी लॉन्ड्रिंग से है। इसका उपयोग नेपाल में टेरर फंडिंग के रूप में किया जा रहा है। इसके प्रमाण मिलने के बाद एफएटीएफ ने नेपाल को 'ग्रे' सूची में शामिल कर दिया है। भारत-नेपाल संबंधों के जानकार यशोदा श्रीवास्तव बताते हैं कि इस सूची में उन देशों को ही शामिल किया जाता है जो आतंकवाद के वित्तपोषण और धन शोधन के लिए सुरक्षित माने जाते हैं।
पूर्व आईपीएस अधिकारी सुरेंद्र तिवारी कहते हैं कि विदेशों से नेपाल के बैंक खातों में धन भेजा जाता है। नेपाली करेंसी में रकम निकालकर भारत पहुंचाई जाती है। यहां से भारतीय रुपये में बदलकर काठमांडू पहुंचाया जाता है। यह पैसा टेरर फंडिंग के काम आता है।