शिक्षा विभाग के साहब बहादुर आजकल कुछ ज्यादा ही टेंशन में हैं। वजह है कुर्सी। चर्चा है कि उनकी एक कुर्सी संकट में है।
हाई लेवल पर यह मंथन हो रहा है कि उनकी एक कुर्सी किसी और को दे दी जाए और दूसरी पर उन्हें बने रहने दिया जाए। सरकार की भृगुटी टेढ़ी होने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
पहली चर्चा एक बीएसए की तैनाती को लेकर है। प्रदेश के मुखिया किसी को संगम नगरी का बीएसए बनाने का निर्देश दिया था, लेकिन कहते हैं कि साहब बहादुर ने इसे टाल दिया। दूसरी चर्चा इनके कामकाज को लेकर है।
ऊपर वाले इनके कामकाज से खुश नहीं हैं, क्योंकि साहब बहादुर न तो शिविर कार्यालय में समय दे रहे हैं और न ही मुख्यालय में। जनप्रतिनिधियों को इनसे मिलने के लिए समय तक नहीं मिल पा रहा है।
इसकी शिकायत भी ऊपर खूब हुई है। माना जा रहा है कि उनपर लोड ज्यादा है। इसलिए यह विचार चल रहा है कि साहब बहादुर के पास केवल एक ही कुर्सी रहने दी जाए। नहीं तो वह सब कुछ बंटाधार कर देंगे।
इसको लेकर वह टेंशन में चल रहे हैं। सबकुछ मैनेज करने में लगे हैं, ताकि दोनों कुर्सियां बची रहें।