उत्तर प्रदेश में थोक के भाव में राज्य मंत्री बनाए गए हैं। जातीय संतुलन साधने के लिए कई लोगों को लालबत्ती दे दी गई।
राज्य मंत्रियों को विभाग तो दे दिया गया है पर काम उनके पास नहीं है। बहुत कम कैबिनेट मंत्री हैं जिन्होंने अपने राज्य मंत्रियों को काम दिए हैं। पर क्षेत्र की जनता को इससे क्या लेना-देना।
वह तो यह जानती है कि उनका विधायक मंत्री है। सो छोटे-मोटे काम के लिए क्षेत्र की जनता चल देती है, उनसे मिलने। ग्रामीण क्षेत्रों के कामकाज से जुड़े एक राज्य मंत्री ऐसे हैं जो क्षेत्र की जनता को लेकर काफी परेशान हैं।
उनकी परेशानी उनके लिए पैरवी करने को लेकर नहीं है। उनकी परेशानी है चाय-पानी का खर्च। वजह जब उनके पास काम नहीं है तो विभाग के अफसर भी घास नहीं डालते हैं।
इसलिए वह कहां तक अपने पैसे से इन लोगों को चाय-पानी कराएं। ऐसी लाल बत्ती किस काम की कि माल आने के बजाय खुद टेंट ढ़ीली करनी पड़े।